
प्रेम दीप तेरा हर दिल में जल रहा है
तेरे नाम से ही सारा उपवन महक रहा है
तेरे दर्श को पाकर ऐसा लग लग रहा है
प्रेम तेरा मुझ पर जैसे बरस रहा है
आनंद में हूँ डूबा तन मन थिरक रहा है
प्रेम दीप तेरा हर दिल में जल रहा है
तेरे नाम से ही सारा उपवन महक रहा है
वक्त कठिन है लेकिन विश्वास जग रहा है
थाम तू लेगा मुझको दिल यह कह रहा है
कला घाना अँधेरा जैसे हट रहा है
प्रेम दीप तेरा हर दिल में जल रहा है
तेरे नाम से ही सारा उपवन महक रहा है
सन सन बहे हवाएं घड़क रही है
सागर की बहकी लहरें पल पल मचल रही है
प्रभु तू अब ये कैसा जहान रच रहा है
प्रेम दीप तेरा हर दिल में जल रहा है
तेरे नाम से ही सारा उपवन महक रहा है
आनंद में हूँ डूबा तन मन थिरक रहा है