
हिन्दी भजन – ब्रज रस भजन लिरिक्स – बी प्राक | हरि रस बैठक
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे ॥
सा ग म प, मा पनि धनिप,
मा पनि धनिम, आ…
निसागमप, मा पनि ध नि प,
मा प नि ध नि म, आ…
मैं तेरे, सिर सिरहाना बन जाऊँ,
तू राधा, मैं कान्हा बन जाऊँ।
तू मेरी दीवानी बन जाए,
मैं तेरा दीवाना बन जाऊँ ॥
हो, रखा ही क्या है तेरे-मेरे शहरों में,
वृन्दावन चल सखी कृष्ण के पैरों में।
वो ही नदी, वो ही दरिया,
वो स्वर्गों का ज़रिया, वो इसकी ही माया है।
रातों के तारे वारे सारे, ये पानी के किनारे,
वो चाँद लेके आया है।
तेरी भूख में खाना बन जाऊँ,
तू शमा, मैं परवाना बन जाऊँ।
तू मेरी दीवानी बन जाए,
मैं तेरा दीवाना बन जाऊँ ॥
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे ॥
जय-जय राधा रमण हरि बोल,
प्यारो राधा रमण हरि बोल।
जय-जय राधा, राधा,
जय-जय राधा, राधा।
जय-जय राधा रमण हरि बोल,
प्यारो राधा रमण हरि बोल ॥
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्यामा-श्याम सुन्दर राधे ॥
श्याम सुन्दर, श्याम सुन्दर राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्यामा-श्याम सुन्दर राधे ॥
जय-जय राधे, जय-जय श्याम,
जय-जय श्री वृन्दावन धाम ।
जय-जय श्री वृन्दावन धाम ॥
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्यामा-श्याम सुन्दर राधे ॥
श्यामा प्यारी, कुंज बिहारी,
जय-जय श्री हरिदास दुलारी।
श्यामा प्यारी, कुंज बिहारी,
जय-जय श्री हरिदास दुलारी ॥
मन भूल मत जइयो,
राधा रानी के चरण,
राधा रानी के चरण,
महारानी के चरण।
मन भूल मत जइयो,
राधा रानी के चरण ॥
राधे-राधे गोविन्द, गोविन्द राधे,
राधे-राधे गोविन्द, गोविन्द राधे।
मन भूल मत जइयो,
राधा रानी के चरण ॥
यशोदा नंदन लाल की जय हो।
बाँके बिहारी लाल की जय हो।
राधा बल्लभ लाल की जय हो।
राधा रमण जू लाल की जय हो।
वृषभानु की किशोरी की जय हो।
वृषभानु के जमाई की जय हो।
वृन्दावन धाम की जय हो।
बरसाना धाम की जय हो ।
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
तुझसे ही धरती है,
तुझसे ही अम्बर है।
तेरे इस रूप से ही
रोशन संसार है।
मुझको भी अपना बना ले,
अपने नैनों में बसा ले,
रंग-रंग जाऊँ तेरे रंग में,
अब कोई न मेरे संग में।
मेरा हाथ थाम ले, तू संभाल ले,
ओ जग के पालनहार ॥
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे-हरे,
हरे राम, हरे राम, राम राम हरे-हरे।
हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे-हरे,
हरे राम, हरे राम, राम राम हरे-हरे ॥