भजन – मेरे सांवरिया नंदलाल मैं तेरे बिना

जैसे जल बिन मीन श्याम बिन भोर
महक बिन फूल नदी बिन छोर
जैसे जल बिन नील श्याम बिन बोर
महक बिन फूल नदी बिन छोर
मेरे सांवरिया नंदलाल
मैं तेरे बिना यूं अधूरी हूं
मेरा आके पूछ लो हाल
मैं तेरे बिना क्यों अधूरी हूं
वृंदावन की गलियों से चरणन की रज को मोहन
हाथ में भर के माथ लगा के
बन जाऊं मैं जोगन बन जाऊं मैं जोगन
जैसे तार बिन साज राग बिन तान
सांस बिन जीव गुरु बिन ज्ञान
जैसे तार बिन सास राग बिन तान
सांस बिन जीव गुरु बिन ज्ञान
मेरे मेरे सांवरिया नंदलाल
मैं तेरे बिना यूं अधूरी हूं
। मेरा आके पूछ लो हाल
मैं तेरे बिना यूं अधूरी हूं
। मेरा आके पूछ लो हाल
मैं तेरे बिना क्यों अधूरी हूं।
लब गुलाब सी पंखुड़ियों में मंदमंद मुस्कुराए
जानबूझ अनजान बने तो है
मोह पे तरस ना आए, मोह पे तरस,
जैसे लौ बिन दिया, धान बिन खेत,
जैसे रस बिन भजन, धरत बिन रेत,
जैसे लाव बिन दिया, धान बिन खेत,
रस बिन भजन धरत बिन रीत
मेरे सांवरिया गोपाल
मैं तेरे बिना यूं अधूरी हूं
मेरे सांवरिया गोपाल
मैं तेरे बिना यूं अधूरी हूं।।
ओ जगत के पालन हारे,
मेरी भी सुध लीनो,
तेरी एक नजर कर देगी,
रोशन रोशनजीना रोशन रोशनजीना।
जैसे सुर बिन ताल ,होली बिन रंग,
जैसे सच बिन प्यार, जेवर बिन अंग।
जैसे सुर बिन ताल, होली बिन रंग,
सच बिन प्यार, जेवर बिन अंग।
मेरे सांवरिया गोपाल,
मैं तेरे बिना यूं अधूरी हूं
मेरा आके पूछ लो हाल,
मैं तेरे बिना क्यों अधूरी हूं।।
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