
बड़े बन ठन के निकले बिहारी
ये बताओ कहां जा रहे हो
मेरे भगतो ने मुझेको बुलाया
अपने भगतों के घर जा रहे है
बड़े बन ठन के निकले बिहारी
ये बताओ कहां जा रहे हो
तुम हाथों में मेहंदी लगाए
और अधरो पे मुरली सजाए
अब मुरली बजाने कन्हैया
ये बताओ कहा जा रहे हो…
मेरे भगतों ने भागवत कराया
और भागवत मे मुझको बुलाया।
भागवत मे सुनाई मेरी गाथा।
मै तो दर्शन दिखाने जा रहा हूँ
बड़े बन ठन के निकले बिहारी
ये बताओ कहां जा रहे हो
तेरे पैरों में घुंघरू बंधा है
और छन छन ये घुंघरू बजाए।
तुम रास रचाने कन्हैया
ये बताओ कहा जा रहे हो।
बड़े बन ठन के निकले बिहारी
ये बताओ कहां जा रहे हो
पीला पटका कमर पे बंधा के
मोर मुकुट को सिर पे सजा के।
काली कम्बली को कांधे पे सजा के
ये बताओ कहा जा रहे हो।
बड़े बन ठन के निकले बिहारी
ये बताओ कहां जा रहे हो
शिव शक्ति मन्दिर मे किर्तन रचाया
नाम ले ले के तुझको बुलाया।
अपने भगतो संग रास रचाने
मेरी राधे वहां जा रहा हूँ।
बड़े बन ठन के निकले बिहारी
ये बताओ कहां जा रहे हो