उन्नीसवाँ अध्याय माघ महात्म्य
उन्नीसवाँ अध्याय माघ महात्म्य वशिष्ठजी बोले- हे राजन्! भगवान श्री दत्तात्रेय जी ने जो इतिहास का वर्णन किया था, वह मैंने तुमको सुना दिया है। अब तुम माघ स्नान का फल श्रवण करो। माघ स्नान समस्त यज्ञों, दानों, तपस्या एवं व्रतों में श्रेष्ठ है । हे दिलीप ! माघ स्नान करने वाले प्राणी के पितर … Read more