तेरहवां अध्याय
तेरहवां अध्याय – मान तथा लाभ के लिए तेरहवां अध्याय ऋषिराज कहने लगे मन में अति हर्षाए। तुम्हें महात्म देवी का मैंने दिया सुनाए। आदि भवानी का बड़ा है जग में प्रभाओ। तुम भी मिल कर वैश्य से देवी के गुण गाओ। यह मोह ममता सारी मिटा देवेगी। सभी आस तुम्हारी पुजा देवेगी। शरण में … Read more