पाण्डवों तथा कौरवों का जन्म

पाण्डवों तथा कौरवों एक बार राजा पाण्डु अपनी दोनों पत्नियों – कुन्ती तथा माद्री – के साथ आखेट के लिये वन में गये। वहाँ उन्हें एक मृग का मैथुनरत जोड़ा दृष्टिगत हुआ। पाण्डु ने तत्काल अपने बाण से उस मृग को घायल कर दिया। मरते हुये मृग ने पाण्डु को शाप दिया, ‘राजन! तुम्हारे समान … Read more

हनुमान पुत्र मकरध्वज की कथा

हनुमान पुत्र मकरध्वज पवनपुत्र हनुमान बाल-ब्रह्मचारी थे। लेकिन मकरध्वज को उनका पुत्र कहा जाता है। यह कथा उसी मकरध्वज की है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, लंका जलाते समय आग की तपिश के कारण हनुमानजी को बहुत पसीना आ रहा था। इसलिए लंका दहन के बाद जब उन्होंने अपनी पूँछ में लगी आग को बुझाने के … Read more

श्री कृष्ण जन्म कथा

श्री कृष्ण जन्म कथा भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात के बारह बजे मथुरा के राजा कंस की जेल मे वासुदेव जी की पत्नि देवी देवकी के गर्भ से सोलह कलाओ से युक्त भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था । इस तिथि को रोहिणी नक्षत्र का विशेष माहात्म्य है। इस दिन देश के … Read more

जब वरुण ने अपने पुत्र की कठोर परीक्षा ली

जब वरुण ने अपने पुत्र की कठोर परीक्षा ली एक बार वरुण के पुत्र भृगु के मन में परमात्मा को जानने की अभिलाषा जाग्रत हुई। उनके पिता वरुण ब्रम्ह निष्ठ योगी थे। अतः भृगु ने पिता से ही अपनी जिज्ञासा शांत करने का विचार किया। वे अपने पिता के पास जाकर बोले- ‘भगवन्!मैं ब्रम्ह को … Read more

सच्चा वीर युयुस्सु कौन था ?

सच्चा वीर युयुस्सु धृतराष्ट्र के एक वैश्य वर्ण की पत्नी थी। उसी के गर्भ से युयुत्सु का जन्म हुआ था। युयुत्सु का स्वभाव गांधारी के सभी पुत्रों से बिलकुल अलग था। वह आपसी कलह और विद्वेष का विरोधी था और सदा धर्म और न्याय की बातें करता था, लकिन चूंकि सत्ता गांधारी के पुत्रों के … Read more

एकदंत कैसे कहलाए गणेश जी

एकदंत कैसे कहलाए गणेश जी महाभारत विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है। इसमें एक लाख से ज्यादा श्लोक हैं। महर्षि वेद व्यास के मुताबिक यह केवल राजा-रानियों की कहानी नहीं बल्कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की कथा है। इस ग्रंथ को लिखने के पीछे भी रोचक कथा है। कहा जाता है कि ब्रह्मा ने … Read more

कुबेर का अहंकार

कुबेर का अहंकार यह एक पौराणिक कथा है। कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन करने की बात सोची। उस में तीनों लोकों … Read more

अहिल्या की कथा

अहिल्या की कथा प्रातःकाल जब राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिलापुरी के वन उपवन आदि देखने के लिये निकले तो उन्होंने एक उपवन में एक निर्जन स्थान देखा। राम बोले, “भगवन्! यह स्थान देखने में तो आश्रम जैसा दिखाई देता है किन्तु क्या कारण है कि यहाँ कोई ऋषिया मुनि दिखाई नहीं देते? … Read more

जब ठगे गए गणेश जी

जब ठगे गए गणेश जी गणेश जी विघ्न विनाशक व शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर कोई सच्चे मन से गणोश जी की वंदना करता है, तो गौरी नंदन तुरंत प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद प्रदान करते हैं। वैसे भी गणेश जी जिस स्थान पर निवास करतेहैं, उनकी दोनों पत्नियां ऋद्धि तथा सिद्धि भी उनके … Read more

कुंती का त्याग

कुंती का त्याग पाण्डव अपनी मां कुंती के साथ इधर से उधर भ्रमण कर रहे थे। वे ब्राह्मणों का वेश धारण किए हुए थे। भिक्षा मांगकर खाते थे और रात में वृक्ष के नीचे सो जाया करते थे| भाग्य और समय की यह कैसी अद्भुत लीला है। जो पांडव हस्तिनापुर राज्य के भागीदार हैं और … Read more