छब्बीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य
छब्बीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य सूतजी कहते हैं कि भागीरथ के वंश में सौरदास नाम का एक राजा हुआ, जिसका पुत्र मित्रसंह था । मित्रसह गुरु वशिष्ठजी के श्राप से राक्षस हो गया, परन्तु गंगाजल के प्रभाव से वह भी भगवान् के परमपद को प्राप्त हुआ। ऋषि पूछने लगे कि हे सूतजी, गुरु वशिष्ठ ने किस … Read more