चौथा अध्याय माघ महात्म्य
चौथा अध्याय माघ महात्म्य वशिष्ठ जी बोले- हे राजन् ! जब भृगु जी अपनी तपस्या में लीन थे तो विद्याधरों का एक दम्पति उनके पास पहुँचा। वे बहुत दुःखी थे और भृगु जी को अपनी कथा सुनाने आये थे। उन्होंने मुनि को श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया और कहा- हे मुनिदेव ! इस दिव्य देह को पाकर … Read more