शुक्र ग्रह (दैत्य गुरु)

शुक्र ग्रह शुक्र ग्रह दैत्यों का गुरु है एवं शुक्र को शुभ ग्रह माना गया है। यह काम, प्रेम और सौंदर्य का देवता है। आग्नेय दिशा का अधिपति है। इसके द्वारा पत्नी-सुख, सौंदर्य, कामेच्छा, वाहन-सुख,संगीत और काव्य आदि का विचार किया जाता है। जन्म कुण्डली में अकेला यह अशुभ प्रभाव jiनहीं देता। शुक्र तुला राशि … Read more

बृहस्पति ग्रह (देवगुरु)

बृहस्पति ग्रह सबका का गुरु है। बृहस्पति को कालपुरुष का ज्ञान माना गया है। ग्रहमंडल में इसको मंत्री का पद प्राप्त है । यह शुभ ग्रह है तथा सुख-समृद्धि, संपदा और प्रतिभा का अधिष्ठाता है। इसकी स्वराशि धनु एवं मीन हैं। यदि इसकी स्थिति प्रतिकूल हो तो जातक को अनेक प्रकार के कार्यों में व्यवधान … Read more

बुध ग्रह (व्यवसाय प्रतिनिधि)

बुध ग्रह का दिन बुधवार है। बुध व्यवसाय का प्रतिनिधि ग्रह है। यह उत्तर दिशा का स्वामी और नपुंसक तथा त्रिदोषकारी है। मनुष्य के शरीर में कंधे से लेकर ग्रीवा तक इसका नियंत्रण होता है। अशुभ बुध के प्रभाव से जातक अविश्वासी,शंकालु और स्वार्थी प्रकृति का हो जाता है, जिसके फलस्वरूप समाज में उसकी प्रतिष्ठा … Read more

मंगल ग्रह – (युद्ध का देवता)

मंगल ग्रह मंगल ग्रह का वार मंगलवार है, रंग लाल है। मंगल चौथे व आठवें घर में अशुभ फलदाई है। जातक रक्त की कमी के कारण अनेक बीमारियों से ग्रस्त रहता है। उसकी आंखें खराब हो जाती हैं। जातक संतान से वंचित रहता है। विवाह संबंधी अड़चनें आती हैं। इसका निवारण अवश्य करवा लेना चाहिए। … Read more

चंद्र ग्रह (सौंदर्य का प्रतीक)

चंद्र ग्रह चंद्र ग्रह का दिन सोमवार है। रंग दूध के समान सफेद हैं। यह राहू से माध्यम एवं केतु से ग्रहण योग बनाता है एवं अशुभ फलदाई होता है। चंद्रमा पीड़ाहारी है। प्रजापति दक्ष ने अपनी २७ (27) कन्याओं का विवाह चंद्रमा से कर दिया था। चंद्रमा की ये २७ पत्नियां ही २७ नक्षत्रों … Read more

सूर्य ग्रह (ग्रहों के अधिपति)

सूर्य ग्रह सूर्य ग्रह का दिन रविवार है। सूर्य दसवें, सातवें व छठे घर में अशुभ फल देता है परन्तु ग्यारहवें, बाहरवें, नौवें, आठवें और पांचवें घरों में शुभ फल देता है। नवग्रहों में सूर्यदेव को राजपद प्राप्त है। सूर्य को पापीग्रह माना गया है। यद्यपि पृथ्वी पर इसके प्रभाव से ही अनाज, धातु तथा … Read more

तुलसी शालिग्राम – तुलसी महिमा शालिग्राम के महत्त्व का वर्णन

तुलसी शालिग्राम की कथा तुलसी शालिग्राम – नारद जी ने कहा: प्रभो! भगवान नारायण ने कौन-सा रूप धारण करके तुलसी से हास-विलास किया था ? यह प्रसंग मुझे बताने की कृपा करें। भगवान नारायण कहते हैं: नारद! भगवान श्री हरि देवताओं का कार्य-साधन करने के लिए वैष्णवी माया फैलाकर शंखचूड़ से कवच ले लिया। फिर … Read more

श्रावण मास आठवाँ अध्याय – shravan maas aathvan adhyay

श्रावण मास आठवाँ अध्याय ईश्वर ने कहा- सनत्कुमार! अब मैं आपसे पाप को नाश करने वाले बुध तथा बृहस्पति व्रत को कहूँगा, जिसे श्रद्धा के साथ करके प्राणी उत्तम सिद्धि प्राप्त करता है। ब्रह्मा ने इन्द्र को ब्राह्मण के राज्यासन पर अभिषिक्त किया। किसी काल में चन्द्रमा ने श्री बृहस्पति की ‘तारा’ नाम वाली पत्नी … Read more

निर्जला एकादशी व्रत का फल वर्ष की सम्पूर्ण एकादशियो के बराबर

निर्जला एकादशी निर्जला एकादशी व्रत कथा भगवान् श्री कृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर से बोले कि- हे राजन्! श्री सूतजी ने इस एकादशी की कथा अनेक ने ऋषि-मुनियों को कही थी। एक बार पाण्डु पुत्र भीम ने अपने पूज्य पितामह व्यासजी से भी निर्जला एकादशी की कथा का वृत्तांत जानने की जिज्ञासा प्रकट की थी । तब … Read more

सूर्य देवता को अर्ध्य क्यों दिया जाता है

सूर्य देवता को अर्ध्य सूर्य देवता को अर्ध्य सबको देना चाहिए। बड़ा कौन? बड़ा वह है जो धर्म की मर्यादा को तनिक भी भंग नहीं करता। बहुत से पढ़े-लिखे लोग सुबह सूर्यनारायण के सम्मुख खटिया में पड़े रहते हैं, सूर्योदय होने के उपरान्त भी खटिया छोड़ते नहीं। सूर्यनारायण के सम्मुख खटिया में लेटने के समान … Read more