बारहवां अध्याय

बारहवां अध्याय – भक्ति प्राप्त करने के लिए बारहवां अध्याय द्वादश अध्याय मे है मां का आर्शीवाद । सुनो राजा तुम मन लगा देवी देव संवाद । महालक्ष्मी बोली तभी करे जो मेरा ध्यान । निशदिन मेरे नामों का जो करता है गान। बाधाएं उसकी सभी करती हूं मैं दूर । उसके ग्रह सुख सम्पत्ति … Read more

ग्यारहवाँ अध्याय

ग्यारहवाँ अध्याय – व्यापार ,सुख के लिए सम्पति के लिए। ग्यारहवाँ अध्याय ऋषिराज कहने लगे सुनो ऐ पृथ्वी नरेश, महा असुर संहार से मिट गए सभी क्लेश इन्द्र आदि सभी देवता टली मुसीबत जान । हाथ जोड़कर अम्बे का करने लगे गुणगान । तू रखवाली मां शरणागत की करे। तू भक्तों के संकट भवानी हरे। … Read more

दसवां अध्याय

दसवां अध्याय – हर प्रकार की मनोकामना के लिए दसवां अध्याय दोहाः ऋषिराज कहने लगे- मारा गया निशुम्भ क्रोध भरा अभिमान ,से बोला भाई शुम्भ। अरी चतुर दुर्गा तुझे लाज जरा न आए। करती है अभिमान तू बल औरों का पाए। जगदाती बोली तभी दुष्ट तेरा अभिमान ।मेरी शक्ति को भला सके कहां पहचान। मेरा … Read more

नवम् अध्याय

नवम् अध्याय – पाठ मात्र से ही मिटे भीष्ण कष्ट अपार नवम् अध्याय राजा बोला ऐ ऋषि महिमा सुनी अपार। रक्तबीज को युद्ध में चण्डी दिया सहार। कहो ऋषिवर अब मुझे शुम्भ निशुम्भ का हाल। जगदम्बे के हाथों से आया कैसे काल । ऋषिराज कहने लगे राजन सुन मन लाय। दुर्गा पाठ का कहता हूं … Read more

आठवां अध्याय

आठवां अध्याय – निस दिन पढ़े जो प्रेम से शत्रु नाश हो जाय आठवां अध्याय दोहा:- काली ने जब कर दिया चण्ड मुण्ड का नाश । सुनकर सेना का मरण हुआ निशुम्भ उदास । तभी क्रोध करके बढ़ा आप आगे। इक्ट्ठे किए दैत्य जो रण से भागे। कुलों की कुलें असुरों की ली बुलाई। दिया … Read more

छटा अध्याय

छटा अध्याय नव दुर्गा के पाठ का छठा है यह अध्याय ।जिसके पढ़ने सुनने से जीव मुक्त हो जाय। ऋषिराज कहने लगे सुन राजन मन लाय।दूत ने आकर शुम्भ को दिया हाल बतलाय। सुनकर सब वृतांत को हुआ क्रोध से लाल । धूम्रलोचन सेनापति बुला लिया तत्काल । आज्ञा दी उस असुर को सेना लेकर … Read more

श्री दुर्गा स्तुति चौथा अध्याय

चौथा अध्याय – श्री दुर्गा स्तुति आदिशक्ति ने जब किया महिषासुर का नास। सभी देवता आ गये तब माता के पास। मुख प्रसन्न से माता के चरणों में सीस झुकाये। करने लगे – वह स्तुति मीठे बैन सुनायें। हम तेरे ही गुण गाते हैं, चरणों में सीस झुकाते है। तेरे जै कार मनाते हैं, जै … Read more

दुर्गा स्तुति तृतीय अध्याय

श्री दुर्गा स्तुति – तृतीय अध्याय चक्षुर ने निज सेना का सुना जभी संहार। क्रोधित होकर लड़ने को आप हुआ तैयार। ऋषि मेधा ने राजा से फिर कहा। सुनों तृतीय अध्याय की अब कथा । महा योद्धा चक्षुर था अभिमान में। गर्जता हुआ आया मैदान में। चलाता महा शक्ति पर तीर था। वह सेनापति असुरों … Read more

दुर्गा स्तुति दूसरा अध्याय

दूसरा अध्याय दुर्गा पाठ का दूसरा शुरु करूं अध्याय । जिसके सुनने पढ़ने से सब संकट मिट जाय। मेधा ऋषि बोले तभी, सुन राजन धर ध्यान । भगवती देवी की कथा करे सब का कल्याण । देव असुर भयो युद्ध अपारा, महिषासुर दैतन सरदारा। योद्धा बली इन्द्र से भिडयो, लड़यो वर्ष शतरणते न फिरयों । … Read more

दुर्गा स्तुति – श्री मंगला जयन्ती स्तोत्र

श्री मंगला जयन्ती स्तोत्र वरमांगू वरदायनी निर्मल बुद्धि दो। मंगला स्तोत्र पढू सिद्ध कामना हो। ऋषियों के यह वाक्य हैं सच्चे सहित प्रमाण , श्रद्धा भाव से जो पढ़े सुने हो जाये कल्याण। जय मां मंगला भद्रकाली महारानी,जयन्ती महा चण्डी दुर्गा भवानी। मधु कैटभ तुम ने थे संहार दीने, मैय्या चण्ड और मुण्ड भी मार … Read more