चतुर्थ ‘कूषमांडा सुखधाम’ – माँ कूष्मांडा

माँ कूष्मांडा

माँ कूष्मांडा

कूषमांडा जै जग सुखदानी ।मुझ पर दया करो महारानी।

पिंगला ज्वालामुखी निराली । शाकम्बरी मां भोली भाली ।

लाखों नाम निराले तेरे । भक्त कई मतवाले तेरे।

भीमा पर्वत पर है डेरा । स्वीकारो प्रणाम ये मेरा ।

सब की सुनती हो जगदम्बे । सुख पहुंचाती हो मां अम्बे।

तेरे दर्शन का मैं प्यासा । पूर्ण कर दो मेरी आशा ।

मां के मन में ममता भारी।क्यों न सुनेगी अरज हमारी।

तेरे दर पर किया है डेरा।दूर करो मां संकट मेरा।

मेरे कारज पूरे कर दो।मेरे तुम भण्डारे भर दो ।

तेरा दास तुझे ही ध्याए । ‘चमन’ तेरे दर सीस झुकाए ।

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