राधे राधे श्री हरिवंश लिरिक्स


भजन – राधे राधे श्री हरिवंश

हिंडोरे झूलत तन सुकुमार
पुलकि पुलकि राधे उर लागत,
प्रीतम प्रान आधार ॥ [1]

भाइ बसन सजे मनसिज के,
उर वर हार सुढार ।
सुख में झूलति कुँवरि लाड़िली,
रमकत स्याम उदार ॥ [2]

जुगल सरूप अनूप विराजत,
मनमथ भेद अपार ।
श्रीरसिक बिहारी की छवि निरखत,
खरे कुंज के द्वार ॥ [3]

हीरे मोतियाँ से नजर उतार दूं लिरिक्स

मेरे गुरु जी का देश निराला लिरिक्स

ब्रज रस भजन लिरिक्स – बी प्राक | हरि रस बैठक

पर्दा ना कर पुजारी दिखने दे राधा प्यारी लिरिक्स

मोहे लादो भजन वाली वही माला जा के रटने से मिल जाए नंदलाला

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