राधे राधे श्री हरिवंश लिरिक्स

भजन – राधे राधे श्री हरिवंश हिंडोरे झूलत तन सुकुमार पुलकि पुलकि राधे उर लागत, प्रीतम प्रान आधार ॥ [1] भाइ बसन सजे मनसिज के, उर वर हार सुढार । सुख में झूलति कुँवरि लाड़िली, रमकत स्याम उदार ॥ [2] जुगल सरूप अनूप विराजत, मनमथ भेद अपार । श्रीरसिक बिहारी की छवि निरखत, खरे कुंज … Read more