सफला एकादशी एकादशी महात्म्य

सफला एकादशी एकादशी महात्म्य युधिष्ठिर ने प्रश्न किया- “हे मधुसूदन! पौष कृष्णा एकादशी का क्या नाम है और उस दिन किस देवता की पूजा की जाती है? ये मुझे विस्तार से कहिए।” भगवान् श्री कृष्ण कहने लगे कि- “हे धर्मराज ! एकादशी व्रत से मैं जितना प्रसन्न होता हूँ उतना अधिक दक्षिणा पाने वाले यज्ञ … Read more

मोक्षदा एकादशी एकादशी महात्म्य

मोक्षदा एकादशी एकादशी महात्म्य श्री युधिष्ठिर बोले – “भगवन्! आप तीनों लोकों के स्वामी, सबको सुख देने वाले और जगत् के पति हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे देव! मेरे संशय को दूर कर मुझे बताइए कि मार्गशीर्ष शुक्ला एकादशी का क्या नाम है? उस दिन कौन से देवता की पूजा की जाती है … Read more

उत्पन्ना एकादशी एकादशी महात्म्य

उत्पन्ना एकादशी एकादशी महात्म्य नैमिषारण्य तीर्थ मे अट्ठासी हजार ऋषि-मुनियों ने एकादशी की उत्पत्ति एवं माहात्म्य के तथ्य को जानने के लिए श्री सूतजी से निवेदन किया। श्री सूतजी ने कहा- हे ऋषियों! द्वापर युग में मनोकामना पूर्ण करने वाली अनन्त पुण्य प्रदायिनी एकादशी की उत्पत्ति, माहात्म्य आदि के बारे में पाण्डव श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने … Read more

पेंतीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य

पेंतीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य पुण्य भी लगता है, या बिना दिया हुआ पुण्य मिलता है। तब सूतजी कहने लगे कि बिना दिये हुए भी पाप पुण्य दोनों मिलते हैं। सत्ययुग में एक के पाप और पुण्य के कारण सारे देश को पाप और पुण्य मिलता था। त्रेता में ग्राम को तथा द्वापर में कुल को … Read more

चौंतीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य

चौंतीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य सूतजी कहते हैं कि यदि किसी में उद्यापन की शक्ति न हो तो ब्राह्मणों को भोजन करा देवे। यदि ब्राह्मण न मिलें तो गौं का पूजन कर ले। यदि गौ भी न मिले तो पीपल अथवा वट का पूजन कर लेवे। यह सुनकर ऋषि पूछने लगे कि महाराज! वृक्ष तो सभी … Read more

तेतीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य

तेतीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य राजा पृथु कहने लगे कि हे नारदजी ! अब आप कृपा करके कार्तिक व्रत का उद्यापन विधि सहित कहिये। तब नारदजी कहने लगे कि कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी को कार्तिक के व्रत की संपूर्णता के निमित्त उसका उद्यापन करना चाहिए। सारे घर में गोबर का चौका लगावे, तुलसी के ऊपर मंडप बनावे … Read more

बत्तीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य

बत्तीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य सूतजी कहते हैं कि ध्वजारोपण (झंडी लगाना) सब पापो को नाश करने वाला है। चारों वर्णों में से जो कोई भी भगवान् के मन्दिर में झंडी लगाता है, वह ब्रह्मादि देवताओं से पूजित होकर विष्णु लोक को प्राप्त हो जाता है। नारदजी कहते हैं कि हे राजा पृथु ! हम तुम्हें … Read more

इकत्तीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य

इकत्तीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य ब्रह्माजी कहते हैं कार्तिक शुक्ला एकादशी जिसको हरि प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं, इस एक व्रत के करने से बाजपेय यज्ञों से भी अधिक फल प्राप्त होता है तथा जन्म- जन्मान्तर के पाप नाश हो जाते हैं। जो चार महीने का चातुर्मास व्रत होता है, वह भी इसी दिन समाप्त होता … Read more

तीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य

तीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य राजा पृथु पूछते हैं, हे नारदजी ! भगवान् का अत्यन्त प्रिय भीष्मपंचक व्रत कैसे प्रसिद्ध हुआ? तब नारदजी कहने लगे, हे राजा पृथु ! यह व्रत आदिकाल से है परन्तु बीच में लुप्त हो गया था। फिर यह कैसे प्रसिद्ध हुआ, सो कथा हम तुमसे कहते हैं, सुनो। श्रीकृष्णजी ने भीष्मजी … Read more

उनत्तीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य

उनत्तीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य राजा पृथु पूछने लगे कि हे नारदजी ! आप वेद, शास्त्र तथा पुराणों के जानने वाले हैं सो कृपा करके यह बतलाइये कि किस देवता की कितनी कितनी परिक्रमा होती हैं और उनका क्या फल होता है? यह वार्ता सुनकर नारदजी कहने लगे कि देवी की एक, सूर्य की सात, अग्नि … Read more