चौथा अध्याय कार्तिक माहात्म्य
चौथा अध्याय कार्तिक माहात्म्य नारदजी ब्रह्माजी से कहते हैं कि हे ब्रह्मन् ! कार्तिक मास में जो दीपदान होता है, उसका माहात्म्य कहिये। ब्रह्माजी कहने लगे कि हे पुत्र ! दीप चाहे स्वर्ण का हो अथवा चांदी, ताँबा, आटा अथवा मिट्टी का हो, अपनी श्रद्धानुसार कार्तिक मास में दान करना चाहिए। ऐसा करने से सब … Read more