श्रावण महात्म्य सातवाँ अध्याय – shravan maas satva adhyay

श्रावण महात्म्य सातवाँ अध्याय ईश्वर ने कहा- हे सनत्कुमार! अब उत्तम मंगलवार का व्रत कहूँगा। जिसके करने से वैधव्य का नाश होता है। विवाहोत्तर पांच साल तक इस व्रत को करें। इसका नाम ‘मंगलागौरी व्रत है। यह पाप को नष्ट करने वाला है। विवाह के अनन्तर पहले श्रावण शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार के दिन … Read more

श्रावण महात्म्य छठा अध्याय – shravan maas chata adhyay

श्रावण महात्म्य छठा अध्याय सनत्कुमार ने शंकरजी से कहा- हे ईश्वर! मैंने हर्ष का कारण रविवार महात्म्य को सुना। अब आप श्रावण महीनों के सोमवार व्रत के महात्म्य को कहें। ईश्वर ने सनत्कुमार से कहा- हे सनत्कुमार! रवि मेरी आँख है। उनका श्रेष्ठ महात्म्य है। पार्वती के सहित क्या इस मेरे सोमनाथ का महात्म्य का … Read more

श्रावण महात्म्य पाँचवां अध्याय – shravan maas panchwa adhyay

श्रावण महात्म्य पाँचवां अध्याय ईश्वर ने कहा- सनत्कुमार कोटिलिंग का महात्म्य तथा पुण्य का विधान नहीं कहा जा सकता है। जब एकलिंग महात्म्य की कथा कहना असम्भव है तो कोटिलंगों के महात्म्य को कौन कह सकता है। इस महीने में एक लिंग के बनाने से भी जीव मेरे पास निवास करता है। भक्ति द्वारा मन … Read more

श्रावण महात्म्य चौथा अध्याय – shravan maas chautha adhyay

श्रावण महात्म्य चौथा अध्याय ईश्वर ने सनत्कुमार जी से कहा- सनत्कुमार धारण पारण व्रत को मैं कहूँगा, उसे आप सुनो। पूर्व प्रतिपदा तिथि को पुण्यवाहक कराकर मेरे प्रसन्नार्थ धारण-पारण व्रत का संकल्प करें। धारण में उपवास तथा पारण में भोजन विहित है। व्रत करने वाला प्राणी मास की समाप्ति में उद्यापन करे। प्रथम श्रावण मास … Read more

सेवा का महत्व – सेवा का सौभाग्य तो विरलों को ही मिलता है।

सेवा का महत्व एक गुरु के दो शिष्य थे। दोनों ईश्वरभक्त थे। दोनों ईश्वर उपासना के बाद रोगियों की सेवा किया करते थे। एक दिन उपासना के समय ही कोई कष्ट पीड़ित रोगी आ गया। गुरुजी ने पूजा कर रहे शिष्यों को बुलवाया। शिष्यों ने कहा-अभी थोड़ी पूजा बाकी है, पूजा समाप्त होते ही आ … Read more

श्री सीता माता

जगज्जननी श्री सीता माता जी श्री सीता माता जी श्री सीता माता प्रेम की मूर्ति हैं और दया की समुद्र हैं। रामायण के अरण्यकाण्ड में जयन्त का प्रसंग आता है। जयन्त ने अपराध श्रीसीता माँ का ही किया परन्तु माताजी को उस पर दया आई। सन्त ऐसा मानते हैं कि जयन्त का अपराध अक्षम्य है, … Read more

श्रीराम नाम

भगवान् शंकर द्वारा श्रीराम नाम की महिमा भगवान् शंकर रामायण के प्रधान आचार्य हैं। रामचरित्र का वर्णन सौ करोड़ श्लोकों में श्रीशिवजी ने किया है- शतकोटिप्रविस्तरम् । रामायण के सौ करोड़ श्लोक हैं, उसको संक्षेप में कौन कर सकता है? शिवजी ने कहा है- ‘मैं श्रीरामजी की कथा करता हूँ, सब दिन सतत राम नाम … Read more

Hare Krishna ! हरे कृष्ण हरे राम महामंत्र का अर्थ

Hare Krishna ! हरे कृष्ण महामंत्र का अर्थ प्रत्येक मनुष्य को हर पल वह आनंद चाहिए जिसका कभी क्षय एवं अंत न हो। आनंद के आगार अर्थात् समुद्र श्रीकृष्ण ही हैं। हमें आनंद चाहिए तो उन श्रीकृष्ण से हमें हमारा मन, बुद्धि, अहंकार एवं चेतना को जोड़ना होगा। उदाहरणार्थ, यदि हमें सरोवर से पानी चाहिए … Read more

shri radha chalisa

श्री राधा chalisa

shri radha chalisa श्री युगल चरण कमलेभ्यो नमः श्री राधा चालीसा दोहा – श्री राधे वृषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार । वृन्दाविपिन विहारिणि प्रणवौं बारंबार ॥ जैसौ तैसौ रावरौ, कृष्ण प्रिया सुखधाम । चरण शरण निज दीजिये, सुन्दर सुखद ललाम ॥ जय वृषभानु कुँवरि श्री श्यामा । कीरति नंदिनी शोभा धामा ॥ नित्य विहारिनि श्याम अधारा । … Read more