धर्मराज की धार्मिकता की कहानी
धर्मराज की धार्मिकता महाराज युधिष्ठिर ने जब सुना कि श्रीकृष्ण ने अपनी लीला का संवरण कर लिया है और यादव परस्पर कलह से ही नष्ट हो चुके हैं, तब उन्होंने अर्जुन के पौत्र परीक्षित का राजतिलक कर दिया। स्वयं सब वस्त्र एवं आभूषण उतार दिए। मौन व्रत लेकर, केश खोले, संन्यास लेकर वे राजभवन से … Read more