लुटा दिया भंडार काशी वाले ने लिरिक्स – शिव भजन

लुटा दिया भंडार

लुटा दिया भंडार काशी वाले ने
कर दिया मालामाल काशी वाले ने

जैसी जो भावना लाया,
वैसा ही वो फल पाया
नहीं खाली उसे लौठाया,
वो मन ही मन हरषाया
कर दिया मालामाल
काशी वाले ने
लुटा दिया भण्डार काशी वाले ने

जो लगन लगाया सच्ची
तो उसकी नाव ना अटकी
नैया को पार लगाया,
नहीं देर करी वो पल की ।

मिटा दिया जंजाल काशी वाले ने
लुटा दिया भण्डार काशी वाले ने

जिसने श्रृंगार सजाया,
बाबा का दर्शन पाया
जिसने मांगा है बेटा,
वो चाँद सा टुकड़ा पाया।
कर दिया मालामाल
काशी वाले ने लुटा दिया
भण्डार काशी वाले ने

चरणों की किया जो सेवा,
वो पाया मिश्री मेवा ।
वो मन ही मन हर्षाया,
नैनों में रूप समाया ।

महल लाडली का बुहारा करेंगे

राधे राधे श्री हरिवंश

हमारे लाडले ठाकुर करे सिंगार प्यारी का

सावन की बरसे बदरिया

हर हाल में दाता का जो शुक्र मनाते हैं

मेरे मन बस जा दातामैं तेनु देखदी रहा

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