इकत्तीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य
इकत्तीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य ब्रह्माजी कहते हैं कार्तिक शुक्ला एकादशी जिसको हरि प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं, इस एक व्रत के करने से बाजपेय यज्ञों से भी अधिक फल प्राप्त होता है तथा जन्म- जन्मान्तर के पाप नाश हो जाते हैं। जो चार महीने का चातुर्मास व्रत होता है, वह भी इसी दिन समाप्त होता … Read more