निर्जला एकादशी व्रत का फल वर्ष की सम्पूर्ण एकादशियो के बराबर

निर्जला एकादशी निर्जला एकादशी व्रत कथा भगवान् श्री कृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर से बोले कि- हे राजन्! श्री सूतजी ने इस एकादशी की कथा अनेक ने ऋषि-मुनियों को कही थी। एक बार पाण्डु पुत्र भीम ने अपने पूज्य पितामह व्यासजी से भी निर्जला एकादशी की कथा का वृत्तांत जानने की जिज्ञासा प्रकट की थी । तब … Read more

श्रावण महात्म्य सातवाँ अध्याय

श्रावण महात्म्य सातवाँ अध्याय ईश्वर ने कहा- हे सनत्कुमार! अब उत्तम मंगलवार का व्रत कहूँगा। जिसके करने से वैधव्य का नाश होता है। विवाहोत्तर पांच साल तक इस व्रत को करें। इसका नाम ‘मंगलागौरी व्रत है। यह पाप को नष्ट करने वाला है। विवाह के अनन्तर पहले श्रावण शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार के दिन … Read more

श्रावण महात्म्य छठा अध्याय

श्रावण महात्म्य छठा अध्याय सनत्कुमार ने शंकरजी से कहा- हे ईश्वर! मैंने हर्ष का कारण रविवार महात्म्य को सुना। अब आप श्रावण महीनों के सोमवार व्रत के महात्म्य को कहें। ईश्वर ने सनत्कुमार से कहा- हे सनत्कुमार! रवि मेरी आँख है। उनका श्रेष्ठ महात्म्य है। पार्वती के सहित क्या इस मेरे सोमनाथ का महात्म्य का … Read more

श्रावण महात्म्य पाँचवां अध्याय

श्रावण महात्म्य पाँचवां अध्याय ईश्वर ने कहा- सनत्कुमार कोटिलिंग का महात्म्य तथा पुण्य का विधान नहीं कहा जा सकता है। जब एकलिंग महात्म्य की कथा कहना असम्भव है तो कोटिलंगों के महात्म्य को कौन कह सकता है। इस महीने में एक लिंग के बनाने से भी जीव मेरे पास निवास करता है। भक्ति द्वारा मन … Read more

श्रावण महात्म्य चौथा अध्याय

श्रावण महात्म्य चौथा अध्याय ईश्वर ने सनत्कुमार जी से कहा- सनत्कुमार धारण पारण व्रत को मैं कहूँगा, उसे आप सुनो। पूर्व प्रतिपदा तिथि को पुण्यवाहक कराकर मेरे प्रसन्नार्थ धारण-पारण व्रत का संकल्प करें। धारण में उपवास तथा पारण में भोजन विहित है। व्रत करने वाला प्राणी मास की समाप्ति में उद्यापन करे। प्रथम श्रावण मास … Read more

श्रावण महात्मय तीसरा अध्याय

श्रावण महात्मय तीसरा अध्याय सनत्कुमार जी ने कहा- हे भगवान! आपने व्रत समुदाय का उद्देश्य कहा! हे स्वामिन! इससे तृप्ति नहीं हुई, अतः आप सविस्तार कहें। सुरेश्वर जिसे सुन मैं कृत-कृत्य हो जाऊं। ईश्वर ने सनत्कुमार से कहा- हे योगीश! जो विद्वान श्रावण मास ‘नक्तव्रत’ कर बिताता है। वह बारह महीनों में नक्तव्रत का फल … Read more

श्रावण महात्म्य दूसरा अध्याय

श्रावण महात्म्य दूसरा अध्याय श्रावण महात्म्य दूसरा अध्याय शंकर जी ने सनत्कुमार से कहा- हे महाभाग ! ब्रह्मा पुत्र आप नम्र हैं। जिस कारण आप श्रद्धालु हैं। समस्त गुणों से युक्त श्रोता हैं। श्रावण मास के बारे में आपने जो पूछा वह प्रसन्नता से आप से कहता हूँ। हे तात! मैं आपसे कहूँगा, एकाग्र मन … Read more

श्रावण महात्म्य पहला अध्याय

श्रावण महात्म्य पहला अध्याय शौनक जी ने सूतजी से पूछा- हे महाभाग ! आपके मुख से अनेक आख्यान सुने मुझे तृप्ति नहीं हुई, फिर भी कुछ सुनने की इच्छा बढ़ती है। जिसके सुनने मात्र से मेरी अन्यत्र श्रवण करने की इच्छा न हो, ऐसी कोई कथा कहिये। सूतजी ने कहा-आप सब मुनिगण. सुनें, आपके कहने … Read more