श्री बाबा गंगाराम चालीसा – अलख निरंजन आप हैं,निरगुण सगुण हमेश
श्री बाबा गंगाराम चालीसा जब जब धरती पर माया का पक्ष सबल हो जाता है तो अशान्ति, अधर्म तथा असत्यता का साम्राज्य हो जाता है। इसका यह अर्थ नहीं कि सत्यता, परमार्थ तथा धर्म एकदम लुप्त हो जाते हैं तथा अधर्म ही अधर्म की बहुलता हो जाती है। होता ऐसा है कि सत्त्वगुण ‘ के … Read more