तेईसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य
तेईसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य यह कथा सुनकर ऋषि कहने लगे-हे सूतजी! भगवान् के चरणों से उत्पन्न हुई गंगाजी की महिमा कहिये। तब सूतजी ने कहा, हे ऋषियों जो कुछ नारदजी ने राजा पृथु से कहा, वही मैं तुमको सुनाता हूं। इन्द्रादिक सब देवताओं को उत्पन्न करने वाले कश्यपजी की दो पत्नियां थीं। एक अदिति, जिसके … Read more