अठारहवाँ अध्याय माघ महात्म्य
अठारहवाँ अध्याय माघ महात्म्य कांचन मालिनी ने कहा- हे राक्षस! मैंने तुम्हारे पूछने पर यह इतिहास तुझे सुना दिया है, अब मेरी शंका मिटाने को तुम भी अपना पूर्व इतिहास सुनाओ। किस पापी कर्म के प्रभाव से तुमको यह भयंकर योनि प्राप्त हुई है तब राक्षस ने कहा- हे सुभगे ! तेरा वृतान्त बड़ा ही … Read more