पच्चीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas
पच्चीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य ईश्वर ने कहा- हे मुनिश्रेष्ठ! सावन महीने की अमावस्या के दिन सब सम्पत्ति प्रदायक ‘पिठोर व्रत’ उत्तम होता है। सब सर्वाधिष्ठान होने से घर को ‘पीठ’ कहा जाता है। उसमें पूजन उपयोगी वस्तु मात्र समुदाय को ‘आर’ कहते हैं। अतः हे मुनीश्वर ! इसका नाम ‘पिठोरव्रत’ हुआ। मैं आपसे इस व्रत … Read more