ग्यारहवाँ अध्याय
ग्यारहवाँ अध्याय – व्यापार ,सुख के लिए सम्पति के लिए। ग्यारहवाँ अध्याय ऋषिराज कहने लगे सुनो ऐ पृथ्वी नरेश, महा असुर संहार से मिट गए सभी क्लेश इन्द्र आदि सभी देवता टली मुसीबत जान । हाथ जोड़कर अम्बे का करने लगे गुणगान । तू रखवाली मां शरणागत की करे। तू भक्तों के संकट भवानी हरे। … Read more