Siddhi Vinayak – The Grand Hindu Temple

siddhi vinayak

Siddhi Vinayak सिद्धिविनायक मंदिर कहाँ स्थित है ? सिद्धिविनायक मंदिर गणेश जी का एक हिंदू मंदिर है ।यह मंदिर महाराष्ट्र के मुंबई शहर में स्थित है ।इसकी गिनती देश के प्रसिद्ध मंदिरों में की जाती है। यह मंदिर 200 साल पुराना मंदिर है। गणपति बप्पा के दर्शन के लिए देश-विदेश से लोग गणेश जी के … Read more

Chintpurni Mata || चिंतपूर्णी माता का इतिहास

jai maa chintpurni

Chintpurni Mata History Chintpurni Mata – कहा जाता है भक्त माई दास को मां चिंतपूर्णी के स्थान के बारे में सबसे पहले पता चला था। बात सन् 1556 से 1700 के आसपास की है। माई दास के पिता अट्ठर नामक गांव के रहने वाले थे। उस समय वह पटियाला रियासत में था। वह बड़े तेजस्वी … Read more

भक्तिमति मणि – बाकें बिहारी का चमत्कार और लीला

बांके बिहारी के चमत्कार

बाकें बिहारी का चमत्कार लगभग सवा सौ वर्ष पहले की बात है । तब वृन्दावन एक छोटा-सा नगर था। नगर के बीचों-बीच एक चौड़ा मार्ग था जो रेल लाईन को काटता हुआ मथुरा जाने वाले मार्ग से जुड़ा हुआ था। रेल की इस क्रासिंग के चारों ओर दावानल कुण्ड, कैमार वन और मोतीझील का सघन … Read more

श्री राधा कौन है ? || Shri Radha

श्री राधा chalisa

श्री राधा कौन है ? – श्री राधा-कृष्णतत्त्व सर्वथा अप्राकृत है, इनका विग्रह अप्राकृत है, इनकी समस्त लीलाएँ अप्राकृत हैं- जो अप्राकृत क्षेत्रमें अप्राकृत मन-बुद्धि-शरीरसे अप्राकृत पात्रों में हुई थीं। अप्राकृत लीला को देखने, सुनने , कहने और समझने के लिये अप्राकृत नेत्र, कर्ण, वाणी और मन-बुद्धि चाहिये। भगवान् के विभिन्न सच्चिदानन्दमय दिव्य लीला-विग्रहों में … Read more

भगवान युगलकिशोर की आरती

Radhe Krishna status

युगलकिशोर की आरती आरति जुगल किसोर की कीजै, तन मन धन न्योछावर कीजै ॥ गौर स्याम मुख निरखन कीजै, प्रेम स्वरूप नयन भर पीजै । रबि ससि कोटि बदनकी सोभा, ताहि देखि मेरो मन लोभा ॥ मोर मुकुट कर मुरली सोहै, नटवर वेष निरख मन मोहै । ओढ़ें पीत नील पट सारी। कुंजन ललना- लाल … Read more

वाणी का महत्त्व क्या है हमारे जीवन में

 वाणी का महत्त्व सन्त-महापुरुषों ने रसना के बारे में फ़रमाया है कि कोई भी बात मुँह से निकालने से पूर्व हृदय के तराजू पर उसे तोल लेना चाहिये। कड़वी बात कहना या वह बात बोलना जिससे दूसरे के दिल को ठेस पहुँचे-बिना प्रयोजन अथवा मर्यादा का उल्लंघन करके बातें करना-यह हानिकर है । एक बार … Read more

मन नाम जप पर केन्द्रित नहीं रह पाता है क्या करें?

मन नाम जप पर

मन नाम जप पर केन्द्रित – प्रश्न: हमारी जिह्वा नाम जप तो कर रही होती है परंतु मन नाम जप पर केन्द्रित नहीं रह पाता है? क्या करें? उत्तरः श्रीकृष्ण का नाम, रूप, लीला, गुण, धाम एक स्वरूप हैं इसलिए नाम जप करते हुए आरंभ में नाम पर ध्यान करना चाहिए और जब इससे मन … Read more

द्रोण गुरु के पद पर – द्रोणाचार्य की कथा

द्रोण – द्रोणाचार्य की कथा गुरु द्रोणाचार्य ब्राह्मण थे, धनुर्विद्या के महान आचार्य थे, पर बड़े गरीब थे। इतने गरीब थे कि जीवन का निर्वाह होना कठिन था। घर में कुल तीन प्राणी थे – द्रोणाचार्य स्वयं, उनकी पत्नी और उनका पुत्र अश्वत्थामा। पुत्र की अवस्था पांच-छ: वर्ष की थी।एक दिन पुत्र ने अपने एक … Read more

द्रुपद का पुत्रेष्टि यज्ञ और द्रुपद कौन था ?

द्रुपद कौन था ? प्राचीन भारत में पुत्रेष्टि यज्ञ के द्वारा तेजस्वी पुत्र प्राप्त करने की प्रथा थी| जब किसी बहुत बड़े नृपति को संतानका अभाव दुख देता था, तो वह ऋषियों और महात्मा ओंके द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ कराता था। यज्ञ के कुंड से हवि बाहर निकलती थी| उस हवि को खाने से मनचाहे पुत्र … Read more

निरमंड आये परशुराम जी की कथा

निरमंड आये परशुराम परशुराम जी की कथा हिमाचल प्रदेश की सुरमई वादियों में यूं तो कदम-कदम पर देवस्थल मौजूद हैं, लेकिन इनमें से कुछ एक ऐसे भी हैं जो अपने में अनूठी गाथाएँ और रहस्य समेटे हुए हैं। ऐसा ही एक मंदिर है निरमंड का परशुराम मंदिर | यह मंदिर शिमला से करीब 150 किलोमीटर … Read more