अट्ठाईसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य

अट्ठाईसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य

इतनी कथा सुनकर ऋषि कहने लगे कि सूतजी ! कृपा करके कार्तिक शुक्ला अष्टमी,

जिसको गोपाष्टमी भी कहते हैं, उसका माहात्म्य सुनाइये।

सूतजी कहने लगे कि बाल्यावस्था में भगवान् कृष्ण पहले बछड़े चराया करते थे।

कार्तिक शुक्ला अष्टमी गोपाष्टमी कहलाती है।

इस दिन सब मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए गौ का पूजन करना चाहिये ।

तदनन्तर प्रदक्षिणा करके गौ के पीछे- पीछे चलना चाहिये।

श्रीकृष्णजी की परमप्रिया श्री राधाजी के नाम से विख्यात राधाकुण्ड में स्नान करके

जो श्रीकृष्णजी का पूजन करता है उसके सब पाप गोधूलि से नाश को प्राप्त हो जाते हैं।

इस दिन गोधूलि के समय गौओं के पीछे चलने से सैकड़ों जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं।

इस दिन गौ का दान करने से असंख्य गौओं के दान का फल मिलता है।

यदि इस दिन सायंकाल के समय श्रवण नक्षत्र हो तो वह जयन्ती योग होता है,

उसमें स्नान दान करने से मनुष्य शीघ्र ही मोक्ष को प्राप्त हो जाता है।

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