दूसरी ब्रह्मचारिणी मन भावे – माँ ब्रह्मचारिणी

माँ ब्रह्मचारिणी

माँ ब्रह्मचारिणी

जै अम्बे ब्रह्मचारिणी माता । जै चतुराणन प्रिय सुख दाता ।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो ।

ब्रह्म मन्त्र है जाप तुम्हारा । जिस को जपे सकल संसारा।

जै गायत्री वेद की माता । जो जन निस दिन तुम्हें ध्याता ।

चमन लालकमी कोई रहने न पाए।कोई भी दुःख सहने न पाए।

उसकी विरति रहे ठिकाने । जो तेरी महिमा को जाने ।

रुद्राक्ष की माला लेकर। जपे जो मन्त्र श्रद्धा देकर।

आलस छोड़ करे गुणगाना ।मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

ब्रह्मचारिणी तेरो नाम । पूर्ण करो सब मेरे काम ।

‘चमन’ तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी ।

तीसरी ‘चन्द्र घंटा शुभ नाम –  माँ चंद्रघण्टा

चमन की श्री दुर्गा स्तुति

श्री दुर्गा स्तुति अध्याय

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दूसरी ब्रह्मचारिणी मन भावे – माँ ब्रह्मचारिणी
तीसरी ‘चन्द्र घंटा शुभ नाम –  माँ चंद्रघण्टा
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