पांचवी देवी असकन्ध माता – माँ स्कंदमाता 

माँ स्कंदमाता 

माँ स्कंदमाता 

माँ स्कंदमाता 

माता जै तेरी हो असकन्ध माता।पांचवां नाम तुम्हारा आता ।

सब के मन की जानन हारी।जग जननी सब की महतारी।

तेरी जोत जलाता रहूं मैं । हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं ।

कई नामों से तुझे पुकारा । मुझे एक है तेरा सहारा ।

कहीं पहाड़ों पर है डेरा । कई शहरों में तेरा बसेरा ।

हर मन्दिर में तेरे नजारे ।गुण गाए तेरे भक्त प्यारे ।

भक्ति अपनी मुझे दिला दो।शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।

इन्द्र आदि देवता मिल सारे । करें पुकार तुम्हारे द्वारे ।

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आये। तू ही खण्डा हाथ उठाये।

दासों को सदा बचाने आई। ‘चमन’ की आस पुजाने आई।

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