मैं की की सिफ़तां दस्सां शिव शंकर दे दरबार दियां लिरिक्स
मैं की की सिफ़तां दस्सां, शिव, शंकर दे, दरबार दियांएहदे, दर दियां, ठंडियां छांवां,-तप्पदे, हिरदे नूं, ठारदियां मैं, की की, सिफ़तां दस्सां…. जद, गौरां नूं, व्याहवण आए ॥ भूत, प्रेत, बराती आए ॥ भूत, प्रेत, बराती आए, सखियां, शिव नूं, ताड़दियां… मैं, की की, सिफ़तां दस्सां… विच, जटावां, गंगा वग्गदी ॥ बैल, सवारी, चंगी लग्गदी … Read more