चौबीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas
चौबीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य ईश्वर ने कहा- हे ब्रह्मपुत्र ! पूर्वकल्प में दैत्य के भार से अति दुःखी, विह्वल, अति दीन हो पृथ्वी ब्रह्मा की शरण में गई। उसके मुख से कथा सुनकर देवगणों के सहित ब्रह्मा ने क्षीरसागर में बहुत स्तुति द्वारा हरि को प्रसन्न किया । ब्रह्मा के मुख से यह सब सुनकर … Read more