अट्ठाईसवाँ अध्याय माघ महात्म्य
अट्ठाईसवाँ अध्याय माघ महात्म्य सारस ने कहा वानर ! तेरा प्रश्न न्याय संगत है। जिस कर्म के कारण मुझे यह कष्टदायी पक्षी की योनि प्राप्त हुई है, उस रहस्य को सुन । पूर्व जन्म में तूने सूर्य ग्रहण के समय सौखारी अन्नदान किया और नर्मदा के तट पर बसे ब्राह्मणों को देने के लिए मुझसे … Read more