Radhe Krishna status or shayari in hindi

Radhe Krishna status

Radhe Krishna status [ श्रीकृष्णके प्रति ] सदा सोचती रहती हूँ मैं, क्या दूँ तुमको, जीवनधन! जो धन देना तुम्हें चाहती, तुम ही हो वह मेरा धन ॥ तुम ही मेरे प्राणप्रिय हो, प्रियतम! सदा तुम्हारी मैं । वस्तु तुम्हारी तुमको देते पल-पल हूँ बलिहारी मैं । प्यारे ! तुम्हें सुनाऊँ कैसे अपने मनकी सहित … Read more

श्री गिरिराज जी की महिमा

श्री गिरिराज जी की महिमा ब्रजमण्डल में जो महत्त्व श्रीवृन्दावन धाम का है,वही महत्व श्री गिरिराज गोवर्द्धन का है । भगवान श्रीकृष्ण के काल के यदि कोई नेत्रगोचर चिन्ह हैं तो वे हैं श्री गिरिराजजी, श्री यमुना महारानी एवं परमपावन ब्रज-रज । ब्रजवासी श्री गिरिराज को भी अपना सब कुछ मानते हैं – सखा, पुत्र, … Read more

श्री गिरिराज चालीसा

श्री गिरिराज चालीसा – ॥ श्री गोवर्द्धनो जयति || बन्दहु वीणा वादिनी, धरि गणपति को ध्यान । महाशक्ति राधा सहित, कृष्ण करौ कल्याण || सुमिरन करि सब देवगण, गुरु पितु बारम्बार । बरनों श्री गिरिराज यश, निज मति के अनुसार || जय हो जग बंदित गिरिराजा । ब्रज मण्डल के श्री महाराजा ॥ विष्णु रूप … Read more

श्री वैष्णों माता चालीसा

श्री वैष्णों माता चालीसा दोहा – गरूड़ वाहिनी वैष्णवी त्रिकूटा पर्वत धाम । काली, लक्ष्मी, सरस्वती शक्ति तुम्हे प्रणाम । नमोः नमोः वैष्णो वरदानी कलि काल में शुभ कल्याणी मणि पर्वत पर ज्योति तुम्हारी पिंडी रूप में हो अवतारी देवी देवता अंश दियो है रत्नाकर घर जन्म लियो है करी तपस्या राम को पाऊँ त्रेता … Read more

शिव को बहुत प्रिय है सावन माह

सावन माह सृष्टि के कण-कण में त्रिदेव शिव शंकर का निवास है। महाधिदेव निराकार रूप में जगत का कल्याण करते हैं तथा साकार रूप में सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के लिए विभिन्न अवतार धारण करते हैं। सदाशिव भगवान शंकर कल्याण के देवाधिदेव हैं। जो भक्त भगवान शिव की शरण में जाते हैं उनका कल्याण निश्चित … Read more

केतु ग्रह (शस्त्रों का अधिनायक)

केतु ग्रह केतु पाप ग्रह होते हुए भी शुभ फल देता है। इसकी स्वराशि मीन, उच्चराशि धनु, नीचराशि मिथुन तथा सिंह मूल त्रिकोण राशि है। यह वृष, धनु और मीन राशि में बलवान होता है। इसका विशेष फल ४८ और ५४ वर्ष में मिलता है। केतु का भाव तमोगुणी और रूप मलिन है। यह शास्त्रों … Read more

राहु ग्रह (विनाश का कारक)

राहु ग्रह राहु उग्र स्वभावी व शत्रुनाशी ग्रह है। यह दक्षिण दिशा का स्वामी तथा विनाशवृत्ति को | लेकर संचरण करने वाला ग्रह है। इसे चांडाल भी कहा गया है। इसका वर्ण धुएं जैसा व वाहन शेर है। कन्या राशि पर इसका आधिपत्य स्वीकार किया गया है। सामान्यतया यह जिस भाव में बैठता है, वहां … Read more

शनि ग्रह (अंतर्मन का स्वामी)

शनि ग्रह बहुत क्रोधी स्वभाव का है। सूर्य का पुत्र होने पर भी शनि सूर्य से शत्रुता रखता है। यह भी सत्य है कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शनि की सक्रियता का प्रत्यक्ष-परोक्ष प्रभाव उपस्थित रहता है। शनि का वार शनिवार तथा रंग काला है। यह ग्रह नपुंसक है भाव न स्त्री है न … Read more

शुक्र ग्रह (दैत्य गुरु)

शुक्र ग्रह शुक्र ग्रह दैत्यों का गुरु है एवं शुक्र को शुभ ग्रह माना गया है। यह काम, प्रेम और सौंदर्य का देवता है। आग्नेय दिशा का अधिपति है। इसके द्वारा पत्नी-सुख, सौंदर्य, कामेच्छा, वाहन-सुख,संगीत और काव्य आदि का विचार किया जाता है। जन्म कुण्डली में अकेला यह अशुभ प्रभाव jiनहीं देता। शुक्र तुला राशि … Read more

बृहस्पति ग्रह (देवगुरु)

बृहस्पति ग्रह सबका का गुरु है। बृहस्पति को कालपुरुष का ज्ञान माना गया है। ग्रहमंडल में इसको मंत्री का पद प्राप्त है । यह शुभ ग्रह है तथा सुख-समृद्धि, संपदा और प्रतिभा का अधिष्ठाता है। इसकी स्वराशि धनु एवं मीन हैं। यदि इसकी स्थिति प्रतिकूल हो तो जातक को अनेक प्रकार के कार्यों में व्यवधान … Read more