दूसरी ब्रह्मचारिणी मन भावे – माँ ब्रह्मचारिणी
माँ ब्रह्मचारिणी जै अम्बे ब्रह्मचारिणी माता । जै चतुराणन प्रिय सुख दाता । ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो । ब्रह्म मन्त्र है जाप तुम्हारा । जिस को जपे सकल संसारा। जै गायत्री वेद की माता । जो जन निस दिन तुम्हें ध्याता । चमन लालकमी कोई रहने न पाए।कोई … Read more