कीलक स्तोत्र
कीलक स्तोत्र मारकडे ऋषि वचन उचारी, सुनने लगे ऋषि बनचारी। नीलकंठ कैलाश निवासी, त्रयनेत्र शिव सहज उदासी। कीलक मंत्र में सिद्धि जानी, कलियुग उल्ट भाव अनुमानी। कील दियो सब यन्त्र मन्त्र तत्रनी शक्ति कीन परतन्त्र। तेही शंकर स्तोत्र चंडिका का, राखियो गुप्त काहू से न कहा। फलदायक स्तोत्र भवानी, कीलक मन्त्र पढे नर ज्ञानी। नित्यपाठ … Read more