jaimaa
दुर्गा सप्तशती दूसरा अध्याय
दुर्गा सप्तशती दूसरा अध्याय ऋषि ने कहा — पूर्व काल में देवताओं और असुरों में पूरे सौ वर्षों तक भयंकर युद्ध हुआ। उस युद्ध में असुरों ने देवताओं को हरा दिया और सब देवताओं को जीत कर महिषासुर स्वयं इन्द्र बन बैठा। तब हारे हुए देवता ब्रह्माजी को आगे कर भगवान विष्णु और शंकर जी … Read more
सावन सोमवार व्रत कथा
सावन सोमवार व्रत कथा सावन सोमवार व्रत कथा विभिन्न पुराणों और लोक कथाओं में वर्णित है। एक प्रसिद्ध कथा है जिसमें शिव भगवान के भक्त बिरभंगन नामक राजकुमार और उसकी पत्नी भागीरथी की कथा है। कथा के अनुसार, बिरभंगन राजकुमार बहुत ही धार्मिक और भक्तिमय थे। वह और उनकी पत्नी भागीरथी नियमित रूप से सावन … Read more
मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है – भजन लिरिक्स
भजन – मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है ★ मेरा आपकी कृपा से ★ मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है, करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है जपते हो तुम मुरारी मेरा ध्यान हो रहा है पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है, हैरान है … Read more
राम नाम के हीरे मोती मैं बिखराऊँ गली गली Lyrics
भजन – राम नाम के हीरे मोती राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली ले लो रे कोई राम का प्यारा, टेर लगाऊँ गली गली । दौलत के दीवाने सुन लो, ऐसा दिन भी आ जायेगा । धन दौलत और माल खजाना, यहीं पड़ा रह जायेगा । कंचन काया माटी होगी, चर्चा होगी … Read more
मेरे उठे विरह की पीर सखी वृन्दावन जाऊँगी
मेरे उठे विरह की पीर सखी वृन्दावन जाऊँगी ★ वृन्दावन जाऊँगी ★ मेरे उठे विरह की पीर सखी वृन्दावन जाऊँगी । बाजे मुरली यमुना तीर सखी वृन्दावन जाऊँगी || श्याम सलौनी सूरत की दीवानी हो गयी । मैं कैसे धाऊँ धीर सखी वृन्दावन जाऊँगी ॥१॥ मेरे उठे विरह की पीर सखी वृन्दावन जाऊँगी । छोड़ … Read more
मेरो राधा रमण गिरधारी – गिरधारी श्याम बनवारी
मेरो राधा रमण गिरधारी ★ संकीर्तन ★ मेरो राधा रमण गिरधारी गिरधारी श्याम बनवारी ॥ ” सवैया” टेड़े पिटारे कटारे किरिट की, माँग के पाग की धारी की जै जै । कुण्डल सोहे कपोलन पै, मुस्कान हूँ धीर प्रहारी की जै जै ॥ राजेश्वरी दिन रात रट्यौ, यही मोहन की वनवारी की जै जै । … Read more
आली मोहे लागै वृन्दावन नीको लिरिक्स | Ali mohe lage lyrics
आली मोहे लागै वृन्दावन नीको । आली मोहे लागै वृन्दावन नीको । घर घर तुलसी ठाकुर सेवा । दर्शन गोविन्द जी को ॥ आली मोहे लागै….. … || 1॥ निर्मल नीर बहत यमुना को । भोजन दूध दही को || आली मोहे लाग …………….॥2 ॥ रत्न सिहासन आप विराजे । मुकुट धरयौ तुलसी को ॥ … Read more
दुर्गा सप्तशती पहला अध्याय
दुर्गा सप्तशती पहला अध्याय श्री मार्कण्डेय जी बोले-मैं भगवान सूर्य के पुत्र सावर्णि के उत्पत्ति की कथा विस्तार से कहता हूँ, आप ध्यान से सुनिए । सूर्य की छाया स्त्री से उत्पन्न सावर्णि जगत जननी महामाया की कृपा से जैसे-जैसे मन्वंतर का अधिपति बना वह कथा सुनिए । पूर्वकाल में स्वारोचिश मन्वंतर के चैत्र वंशी … Read more
अथ कीलक स्तोत्र – दुर्गा सप्तशती
अथ कीलक स्तोत्र श्री मार्कण्डेय ऋषि बोले-मैं उन भगवान सदाशिव को नमस्कार करता हूँ, जिनके तीन दिव्य नेत्र हैं, जिनका शरीर विशुद्ध ज्ञान स्वरूप है, जो मोक्ष प्राप्ति के कारण है अर्द्ध चन्द्रमा जिनके मस्तक पर शोभायमान है । मन्त्रों के शाप एवं उत्कीलन आदि को समझ कर पाठ करने वाला पुरुष मोक्ष पा लेता … Read more