सोलहवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य
सोलहवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य नारदजी कहते हैं कि अब मैं दीप दान तथा भगवान् के मन्दिर में मार्जन (झाड़ू) का वही माहात्म्य कहता हूं जोब्रह्माजी ने मुझे बताया था। पहले चन्द्र वंश में जयध्वज नाम का एक प्रभु भक्त राजा था। राजा स्वयं मन्दिर में जाकर मार्जन करता तथा दीप जलाता था। एक समय वीतिहोत्र … Read more