सत्ताईसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य
सत्ताईसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य इस प्रकार वह राक्षस और पिशाचिनी दोनों घूमते-फिरते नर्मदा नदी के किनारे एक वट वृक्ष के नीचे आकर ठहरे। उस वट वृक्ष पर गुरु का निन्दक एक ब्रह्मराक्षस रहता था। उन दोनों को वहाँ पर आया हुआ देखकर वह कहने लगा कि अरे तुम कौन हो, और किस पाप से इस … Read more