छब्बीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas

छब्बीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य ईश्वर ने कहा- सावन महीने की अमावस्या के दिन जो करना चाहिये वह प्रसंगवश जो कुछ याद हो गया है, उसे मैं आपसे कहूँगा। पहले महाबली पराक्रमी, संसारविध्वंसक देवतोच्छेदन कारी दुष्ट दैत्यों के साथ रमणीय शुभ वृषभ पर आरूढ़ हो बहुत बार संग्राम किया। हर महाबली, पराक्रमी वृषभ ने मुझे युद्ध … Read more

पच्चीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas

पच्चीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य ईश्वर ने कहा- हे मुनिश्रेष्ठ! सावन महीने की अमावस्या के दिन सब सम्पत्ति प्रदायक ‘पिठोर व्रत’ उत्तम होता है। सब सर्वाधिष्ठान होने से घर को ‘पीठ’ कहा जाता है। उसमें पूजन उपयोगी वस्तु मात्र समुदाय को ‘आर’ कहते हैं। अतः हे मुनीश्वर ! इसका नाम ‘पिठोरव्रत’ हुआ। मैं आपसे इस व्रत … Read more

चौबीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas

चौबीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य ईश्वर ने कहा- हे ब्रह्मपुत्र ! पूर्वकल्प में दैत्य के भार से अति दुःखी, विह्वल, अति दीन हो पृथ्वी ब्रह्मा की शरण में गई। उसके मुख से कथा सुनकर देवगणों के सहित ब्रह्मा ने क्षीरसागर में बहुत स्तुति द्वारा हरि को प्रसन्न किया । ब्रह्मा के मुख से यह सब सुनकर … Read more

तेइसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas

तेइसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य ईश्वर ने कहा- सावन महीने की कृष्ण पक्ष अष्टमी के रोज वृष के चन्द्रमा की आधी रात के समय इस योग के आने से देवकी ने वसुदेव कृष्ण को उत्पन्न किया। यों सिंहराशि के सूर्य आने पर महोत्सव करे। पहले सप्तमी के रोज दन्तधावन कर अल्प भोजन करें। रात में जितेन्द्रय … Read more

बाईसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas

बाईसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य ईश्वर ने कहा- हे मुनिसत्तम! सावन शुक्ल पक्ष चतुर्थी के रोज सब काम फलप्रद, संकट हरण होते हैं। हे देव! किस विधि से व्रत तथा पूजा कर? कब उद्यापन करें? यह सब मुझे सविस्तार कहें। ईश्वर ने कहा- चतुर्थी के रोज सुबह उठकर दन्तधावन आदि क्रिया को समाप्त कर, पुण्यदाता शुभ … Read more

इक्कीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas

इक्कीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य ईश्वर ने कहा- हे सनत्कुमार! श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के रोज वेदोत्सर्जन उपाकर्म होता है या पौष मास की पूर्णिमा तिथि उत्सर्जन की कही गई है। उत्सर्जन में पौष मास या माघ मास या प्रतिपदा तिथि या रोहिणी नक्षत्र कहा गया है। दूसरा समय करना उत्तम कहा गया है। अतः श्रावण मास … Read more

बीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas

बीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य ईश्वर ने सनत्कुमार से कहा- हे सनत्कुमार! आपके समक्ष अब त्रयोदशी के दिन के कार्य को कहता हूँ। उस दिन कामदेव की सोलह उपचारों से पूजा करे । अशोक, मालती, पद्म देवप्रिय, कौसुम्भ, बकुल तथा अन्य मादक पुष्प तथा लाल चावल, पीले चन्दन, सुगन्धित शुभ द्रव्य, पौष्टिक जनक द्रव्य और दूसरे … Read more

उन्नीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas

उन्नीसवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य ईश्वर ने कहा- हे महामुने! सावन महीने के दोनों पक्षों की एकादशी तिथि के रोज जो कार्य करना होगा, उसे मैं कहूँगा, उसे आप सुनिए । हे वत्स ! इस व्रत को मैंने आज तक किसी से भी नहीं कहा। हे विप्र ! उसे आपसे कहूँगा । आप एकाग्र मन से … Read more

अठारहवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas

अठारहवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य सनत्कुमार ने कहा- हे भगवान, हे पार्वती नाथ, हे दयासिन्धो ! दशमी तिथि के महात्म्य को कहिए। ईश्वर ने कहा- हे सनत्कुमार! सावन महीने की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि के रोज इस व्रत का शुभारम्भ कर प्रति महीने की दशमी तिथि के रोज व्रत करे। इस तरह बारह महीने उत्तम व्रत … Read more

सत्रहवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य – shravan maas

सत्रहवाँ अध्याय श्रावण महात्म्य ईश्वर ने सनत्कुमार से कहा- हे देवेश ! अब शुभ पवित्रारोपण कहूँगा। पहली सप्तमी के रोज अधिवासन कर, अष्टमी के रोज पवित्रारोपण करे। जो जीव पवित्र बनवाता है, उसके सुपुण्य का फल सुनो। हे विप्र ! वह सब यज्ञ, व्रत, दान तथा सब तीर्थाधिशेचन का फल प्राप्त कर लेता है, इसमें … Read more