Kanha mere Kanha mere Kanha | कान्हा मेरे कान्हा मेरे कान्हा

Kanha mere Kanha mere Kanha lyrics कान्हा मेरे कान्हा मेरे कान्हा कान्हा मेरे कान्हा मेरे कान्हा कान्हा मेरे, कान्हा मेरे, कान्हा मैं निहारू तुझे, जो सवारू तुझे मेरी आंखें ये कान्हा से हट ती नहीं तेरी बंसी की धुन पे, नाचू होके मगन मेरी भक्ति ये दुनिया समझती नहीं हां मैं पागल दीवानी, चाहूं दर्शन … Read more

नी मैं नचना शाम दे नाल आज मैनु | Nachna sham de nal lyrics

नी मैं नचना शाम दे नाल आज मैनु नच लेन दे ॥ 1. दुनिया लयी मैं नचैया बथेरा, फिर भी ना कोई बनया मेरा,नी मैं की करना संसार आज मैनु नच लेन दे, नी मैं नचना मोहन दे नाल आज मैनु नच लेन दे ॥ नी मैं नचना शाम दे नाल आज मैनु नच लेन … Read more

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं | Achyutam Keshavam Krishna Damodaram

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम | कौन कहता हे भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता है भगवान खाते नहीं, बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं । अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम । कौन कहता … Read more

छोटी छोटी गैया लिरिक्स | chhoti chhoti gaiya – कृष्णा भजन

भजन – छोटी छोटी गैया छोटे छोटे ग्वाल छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल । छोटो सो मेरो मदन गोपाल ॥ छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल । छोटो सो मेरो मदन गोपाल ॥ आगे आगे गैया पीछे पीछे ग्वाल । बीच में मेरो मदन गोपाल || छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल । छोटो … Read more

Vrindavan lyrics Roshan Prince – मेरे बांके बिहारी को मैं मिलने

Vrindavan lyrics Roshan Prince – मेरे बांके बिहारी को मैं मिलने वृन्दावन आया मेरे बांके बिहारी को मैं मिलने वृन्दावन आया मेरे बांके बिहारी को मैं मिलने वृन्दावन आया, मेरे बांके बिहारी को मैं मिलने वृन्दावन आया, लेके फूलों के हार कितने साजो श्रृंगार, लेके फूलों के हार कितने साजो श्रृंगार, मैं तो हो के … Read more

दुर्गा सप्तशती तेरहवाँ अध्याय |Durga saptshati terwa adhyay

दुर्गा सप्तशती तेरहवाँ अध्याय ऋषि बोले-हे राजन् ! भगवती का यह श्रेष्ठ महात्म्य मैंने तुम्हें सुना दिया इस संसार को धारण करने वाली भगवती का ऐसा प्रभाव है इसी कारण हे राजन् आप उस परमेश्वरी की शरण में ही जाइए और वही भगवती आराधना करने से मनुष्यों को भोग, स्वर्ग, मोक्ष आदि देती हैं। मार्कण्डेय … Read more

दुर्गा सप्तशती ग्यारहवाँ अध्याय |Durga saptshati gyarva adhyay

दुर्गा सप्तशती ग्यारहवाँ अध्याय ऋषि बोले–देवी के द्वारा महा दैत्यपति शुम्भ के मारे जाने पर इन्द्रादिक समस्त देवताओं ने अग्नि को आगे करके अभीष्ट के प्राप्त होने के कारण कात्यायनी देवी की स्तुति करने लगे उनके मुख कमल खिल गए थे। देवता बोले- हे शरणागत के दुःखों को दूर करने वाली देवी ! सम्पूर्ण संसार … Read more

दुर्गा सप्तशती बारहवाँ अध्याय |Durga saptshati barahwa adhyay

दुर्गा सप्तशती बारहवाँ अध्याय देवी बोलीं–जो मनुष्य एकाग्र मन से नित्य-प्रति स्तोत्र (दुर्गा सप्तशती) से मेरी प्रार्थना करता है उस मनुष्य की समस्त बाधाओं का मैं निश्चय ही शमन कर देती हूँ। जो मधु कैटभ का विनाश महिषासुर का घात और शुम्भ निशुम्भ के वध का कीर्तन करेंगे तथा अष्टमी, चतुर्दशी तथा दोनों पक्ष की … Read more

दुर्गा सप्तशती दसवां अध्याय |Durga saptshati dasam adhyay

दुर्गा सप्तशती दसवां अध्याय ऋषि बोले-अपने प्राणप्रिय भ्राता निशुम्भ को मरा हुआ देख सारी सेना का संहार होता हुआ जान शुम्भ कुपित होकर बोला–दुष्ट दुर्गे ! तू अभिमान न कर, तू दूसरों के बल का सहारा लेकर झूठे अभिमानों में चूर होकर संग्राम करती है। देवी बोली–रे दुष्ट ! इस संसार में मैं अकेली हूँ … Read more

दुर्गा सप्तशती नौवां अध्याय |Durga saptshati nova adhyay

दुर्गा सप्तशती नौवां अध्याय राजा ने कहा–हे भगवन्! आपने रक्तबीज के वध से सम्बन्ध रखने वाला देवी का चरित्र मुझसे कहा रक्तबीज की मृत्यु के उपरान्त क्रोधित शुम्भ और निशुम्भ ने क्या किया अब यह सुनना चाहता हूँ। ऋषि बोले-हे नृप ! रक्तबीज की सेना सहित मरने पर शुम्भ और निशुम्भ बहुत क्रोधित हुये इस … Read more