तेरहवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य
तेरहवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य इतनी कथा सुनकर राजा पृथु ने कहा कि हे महाराज! कृपा करके भगवान् की पूजा का माहात्म्य कहिये। तब नारद जी कहने लगे कि हे राजा! जो हंसी में भी भगवान् का भजन करता है वह परमपद को प्राप्त हो जाता है। परन्तु जो श्रद्धापूर्वक भजन करता है उसका तो कहना … Read more