पच्चीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य
पच्चीसवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य शुक्राचार्यजी कहने लगे कि हे राजा बलि ! विष्णु तुम्हारा राज्य लेने के लिए अदिति के गर्भ से जन्म लेकर, वही तुम्हारे यज्ञ में आये हैं सो तुम इनको कुछ भी देना मत। हे राजन्! मेरा कहना मानो । नीतिशास्त्र का कहना है कि अपनी बुद्धि से गुरु की बुद्धि अधिक … Read more