आठवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य
आठवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य नारदजी कहने लगे कि हे राजा पृथु ! जालन्धर ने हमारा बड़ा आदर और सत्कार किया। भक्ति भाव से पूजन करके कहने लगा कि महाराज! आपका कैसे आगमन हुआ और मेरे लिए क्या आज्ञा है? हमने कहा कि दैत्यराज ! मैं कैलाश गया था। वहाँ पार्वती सहित अवधूत शिव और उनका … Read more