पाँचवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य
पाँचवाँ अध्याय कार्तिक माहात्म्य नारद जी कहने लगे कि हे ब्रह्मन्! कार्तिक मास का कोई अन्य सुन्दर व्रत कहिये। तब ब्रह्माजी कहने लगे कि हे पुत्र ! विधिवित् जो परम पवित्र और पापनाशक नक्त व्रत है, वह सौभाग्यवती स्त्री को अवश्य करना चाहिए। नारदजी ने प्रश्न किया कि हे ब्रह्मन् ! उस व्रत की क्या … Read more