श्रावण महात्म्य पहला अध्याय

श्रावण महात्म्य पहला अध्याय

शौनक जी ने सूतजी से पूछा- हे महाभाग ! आपके मुख से अनेक आख्यान सुने मुझे तृप्ति नहीं हुई, फिर भी कुछ सुनने की इच्छा बढ़ती है। जिसके सुनने मात्र से मेरी अन्यत्र श्रवण करने की इच्छा न हो, ऐसी कोई कथा कहिये।

सूतजी ने कहा-आप सब मुनिगण. सुनें, आपके कहने से मैं प्रसन्न हूँ और आपके लिए मेरे पास कोई भी गुप्त बात नहीं है।

दम्भ रहित होना, आस्तिक बुद्धि होना, सुनने की इच्छा होना, नम्रता होना, ब्राह्मण भक्त होना, सुशील स्वभाव होना, धैर्यवान होना, पवित्र होना, तपस्वी होना, दोषारोपण रहित होना, ये बारह गुण श्रोता के कहे गये हैं।

वे सब गुण आप लोगों में ही हैं, इससे मैं प्रसन्न हूँ आपसे तत्व बात कहता हूँ।एक बार ईश्वर ने सनत्कुमार से कहा हे- सनत्कुमार! हे सुब्रत! हे ब्रह्मा के पुत्र! आपकी सेवा भक्ति से प्रसन्न हो, मैं आपसे अत्यन्त गुप्त बात कहूँगा।

बारह महीने में श्रावण महीना मुझे अत्यन्त प्रिय है, जो श्रावण मास का महात्म्य सुनने योग्य हो जाने के कारण मास का श्रावण नाम हुआ। पूर्णिमा को श्रावण नक्षत्र के योग हो जाने से भी इस मास का श्रावण नाम कहा। जो श्रवण मात्र से सिद्धि देने वाला है।

अतः श्रावण नाम कहा। आकाश के समान स्वच्छ हो जाने से नभा नाम कहा, उसके मास के धर्मों की गणना करने के लिए भूमि पर कौन समर्थ हो सकता है? जिसके सम्पूर्ण फलों को कहने के लिए ब्रह्मा हुए।

जिस श्रावण मास के महात्म्य को देखने के लिए इन्द्र हुए। भगवान अनन्त ने जिसके फल को कहने के लिये दो सहस्त्र जिह्वा धारण की। अधिक कहने से क्या? इस मास को देखने तथा कहने में किसी की सामर्थ्य नहीं है।

हे मुने! अन्य मास इस मास की कला को भी नहीं प्राप्त कर सकते। सम्पूर्ण मास व्रत के रूप में है। सारा श्रावण मास धर्मरूप है। इस महीने में कोई भी दिन शून्य नहीं देखा गया। इस मास में सब तिथि व्रत वाली हैं।

सनत्कुमार ने कहा- हे भगवान आपने जो कहा इस मास में कोई भी दिन व्रत शून्य नहीं है। इस महीने में तिथि भी व्रत शून्य नहीं है। हे श्रेष्ठ! उसको आप मुझसे कहें। कौन सा व्रत होता है, उस व्रत का अधिकारी कौन है,

फल क्या है, विधि क्या है, किस किसने व्रत किया, उद्यापन विधि क्या है? देवता कौन है? पूज्य कौन है? पूजन सामग्री क्या है? प्रधान पूजन किसका है? जागरण विधि क्या है? किस व्रत का कौन समय है? हे प्रभो! वह मुझसे कहें।

श्रावण मास कैसे आपको प्रिय हुआ? किसलिए पवित्रतम कहा गया? इस मास में कौन अनुष्ठान करने योग्य हैं? हे प्रभो! मुझसे कहें। आपके समक्ष मुझ मूर्ख को प्रश्न करने का कितना ज्ञान हो सकता है? पूछने से जो रह गया है, वह सब मुझसे कहें।

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