श्री राधा कौन है ? || Shri Radha

श्री राधा chalisa

श्री राधा कौन है ? – श्री राधा-कृष्णतत्त्व सर्वथा अप्राकृत है, इनका विग्रह अप्राकृत है, इनकी समस्त लीलाएँ अप्राकृत हैं- जो अप्राकृत क्षेत्रमें अप्राकृत मन-बुद्धि-शरीरसे अप्राकृत पात्रों में हुई थीं। अप्राकृत लीला को देखने, सुनने , कहने और समझने के लिये अप्राकृत नेत्र, कर्ण, वाणी और मन-बुद्धि चाहिये। भगवान् के विभिन्न सच्चिदानन्दमय दिव्य लीला-विग्रहों में … Read more

भगवान युगलकिशोर की आरती

Radhe Krishna status

युगलकिशोर की आरती आरति जुगल किसोर की कीजै, तन मन धन न्योछावर कीजै ॥ गौर स्याम मुख निरखन कीजै, प्रेम स्वरूप नयन भर पीजै । रबि ससि कोटि बदनकी सोभा, ताहि देखि मेरो मन लोभा ॥ मोर मुकुट कर मुरली सोहै, नटवर वेष निरख मन मोहै । ओढ़ें पीत नील पट सारी। कुंजन ललना- लाल … Read more

वाणी का महत्त्व क्या है हमारे जीवन में

 वाणी का महत्त्व सन्त-महापुरुषों ने रसना के बारे में फ़रमाया है कि कोई भी बात मुँह से निकालने से पूर्व हृदय के तराजू पर उसे तोल लेना चाहिये। कड़वी बात कहना या वह बात बोलना जिससे दूसरे के दिल को ठेस पहुँचे-बिना प्रयोजन अथवा मर्यादा का उल्लंघन करके बातें करना-यह हानिकर है । एक बार … Read more

मन नाम जप पर केन्द्रित नहीं रह पाता है क्या करें?

मन नाम जप पर

मन नाम जप पर केन्द्रित – प्रश्न: हमारी जिह्वा नाम जप तो कर रही होती है परंतु मन नाम जप पर केन्द्रित नहीं रह पाता है? क्या करें? उत्तरः श्रीकृष्ण का नाम, रूप, लीला, गुण, धाम एक स्वरूप हैं इसलिए नाम जप करते हुए आरंभ में नाम पर ध्यान करना चाहिए और जब इससे मन … Read more

द्रोण गुरु के पद पर – द्रोणाचार्य की कथा

द्रोण – द्रोणाचार्य की कथा गुरु द्रोणाचार्य ब्राह्मण थे, धनुर्विद्या के महान आचार्य थे, पर बड़े गरीब थे। इतने गरीब थे कि जीवन का निर्वाह होना कठिन था। घर में कुल तीन प्राणी थे – द्रोणाचार्य स्वयं, उनकी पत्नी और उनका पुत्र अश्वत्थामा। पुत्र की अवस्था पांच-छ: वर्ष की थी।एक दिन पुत्र ने अपने एक … Read more

द्रुपद का पुत्रेष्टि यज्ञ और द्रुपद कौन था ?

द्रुपद कौन था ? प्राचीन भारत में पुत्रेष्टि यज्ञ के द्वारा तेजस्वी पुत्र प्राप्त करने की प्रथा थी| जब किसी बहुत बड़े नृपति को संतानका अभाव दुख देता था, तो वह ऋषियों और महात्मा ओंके द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ कराता था। यज्ञ के कुंड से हवि बाहर निकलती थी| उस हवि को खाने से मनचाहे पुत्र … Read more

निरमंड आये परशुराम जी की कथा

निरमंड आये परशुराम परशुराम जी की कथा हिमाचल प्रदेश की सुरमई वादियों में यूं तो कदम-कदम पर देवस्थल मौजूद हैं, लेकिन इनमें से कुछ एक ऐसे भी हैं जो अपने में अनूठी गाथाएँ और रहस्य समेटे हुए हैं। ऐसा ही एक मंदिर है निरमंड का परशुराम मंदिर | यह मंदिर शिमला से करीब 150 किलोमीटर … Read more

होलिका का पूजन क्यों किया जाता है?

होलिका लोगों के मन में एक प्रश्न रहता है कि जिस होलिका ने प्रहलाद जैसे प्रभु भक्त को जलाने का प्रयत्न किया, उसका हजारों वर्षों से हम पूजन किसलिए करते हैं? होलिका पूजन के पीछे एक बात है। जिस दिन होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठने वाली थी, उस दिन नगर के सभी लोगों … Read more

शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा दर्शन क्यों नहीं करना चाहिए ?

शुक्ल चतुर्थी एक बार नंदकिशोर ने सनतकुमारों से कहा कि चौथ की चंद्रमा के दर्शन करने से श्रीकृष्ण पर जो लांछन लगा था, वह सिद्धि विनायक व्रत करने से ही दूर हुआ था। ऐसा सुनकर सनतकुमारों को आश्चर्य हुआ। उन्होंने पूर्णब्रह्म श्रीकृष्ण को कलंक लगने की कथा पूछी तो नंदकिशोर ने बताया- एक बार जरासन्ध … Read more

घटोत्कच का जन्म

घटोत्कच कौन था ? सुरंग के रास्ते लाक्षागृह से निकल कर पाण्डव अपनी माता के साथ वन के अन्दर चले गये। कई कोस चलने के कारण भीमसेन को छोड़ कर शेष लोग थकान से बेहाल हो गये और एक वट वृक्ष के नीचे लेट गये। माता कुन्ती प्यास से व्याकुल थीं इसलिये भीमसेन किसी जलाशय … Read more