कजरी तीज क्यों मनाई जाती है

कजरी तीज

कजरी तीज एक हिंदू त्यौहार है जो भारत में मनाया जाता है। यह त्यौहार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को समर्पित होता है, जिसका मतलब होता है कि यह त्यौहार अगस्त या सितंबर के महीने में मनाया जाने वाला त्यौहार है।

कजरी तीज का उत्सव मुख्य रूप से उत्तर भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश में।

कजरी तीज का यह त्यौहार मुख्य रूप से सावन मास में आते ही स्त्रियों द्वारा भगवान शिव और पार्वती की पूजा एवं व्रत के रूप में मनाया जाता है। सावन मास में भगवान शिव के व्रत के दौरान, स्त्रियाँ भगवान शिव की कृपा और अपने पति के लंबे जीवन और सुख-शांति की कामना करती हैं।

कजरी तीज के दिन, स्त्रियाँ सुबह से ही उठकर स्नान करती हैं और व्रत की शुरुआत करती हैं। वे सावन के पेड़ के नीचे बैठकर भजन गाती हैं और व्रत कथा सुनती हैं। जगह जगहों पर, सावन के मौसम में की बरसात होती है। जिससे इस उत्सव को और भी सुंदर बना देती है।

कजरी तीज के दिन, स्त्रियाँ विशेष रूप से हरा-भरा वस्त्र पहनती हैं, और मेहदी भी लगाती हैं। भगवान शिव और पार्वती की मूर्तियों के सामने विशेष पूजा अर्चना की जाती है, और प्रसाद के रूप में कजरी (एक प्रकार की सब्जी) मीठे और फल उपहार भी भगवान को अर्पित किए जाते हैं।

कजरी तीज क्यों मनाया जाता है?

कजरी तीज के दिन, स्त्रियाँ व्रत रखती हैं और भगवान शिव और पार्वती की पूजा करती हैं। इस दिन व्रती महिलाएं भगवान शिव और पार्वती की अनमोल भक्ति का संदेश देने वाले हैं और उनके लंबे जीवन और पति के सुख-शांति की कामना करती हैं। इस व्रत के दौरान, स्त्रियाँ सुबह से ही उठकर स्नान करती हैं, विशेष पूजा-अर्चना करती हैं, भजन गाती है और व्रत कथा का पाठ करती हैं।

भारतीय परंपरा में शिव-पार्वती को देवताओं का सर्वोच्च दिव्य संयोग या दिव्य मां समझा जाता है, और सावन मास में इनकी पूजा का खास महत्व होता है। इस त्यौहार के माध्यम से, स्त्रियाँ अपने पति के सुख-शांति की कामना करती हैं और अपने जीवन साथी के प्रति अपनी प्रेम भावना का प्रदर्शन करती हैं। इस व्रत के माध्यम से, भक्ति, समर्पण समाधान, और प्रेम की भावना को प्रकट किया जाता है जो एक सुखी और समृद्ध जीवन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

कजरी तीज की पूजा कैसे की जाती है

कजरी तीज त्यौहार को मनाने के लिए निम्नलिखित रीति-रिवाज़ का पालन किया जाता है।

स्नान(शौच खान)

सबसे पहले इस त्यौहार के दिन भगवान शिव और पार्वती की पूजा के लिए स्त्रियाँ सुबह स्नान करती हैं। इस स्थान को शौच स्त्रान कहा जाता है, जिससे शुद्धता और पवित्रता की प्राप्ति होती है।

व्रत कथा का पाठ

स्नान के बाद, स्त्रियाँ भगवान शिव और पार्वती की कथा का पाठ करती हैं। इसमें उन्हें भगवान शिव की महिमा और उनके व्रत के महत्व के बारे में जानने का अवसर मिलता है।

पूजा-अर्चना

भगवान शिव और पार्वती की मूर्तियों के समक्ष पूजा-अर्चना करना त्यौहार का महत्वपूर्ण अंग है। प्रतिमा को सजाने और सिंदूर, चावल, फूल, दीपक, धूप, नैवेद्य (भोग), बिल्वपत्र, फल, और मिठाई आदि के साथ पूजा किया जाता है।

कजरी व्रत कथा का सुनना

कजरी तीज के दिन व्रती स्त्रियाँ व्रत कथा का पाठ करती हैं जो इस त्यौहार की प्रसिद्ध भगवान शिव कथा को समझाती है। इस कथा को सुनकर भक्तों को धार्मिक और सामाजिक शिक्षा प्राप्त होती है।

कजरी भोजन

त्यौहार के दिन व्रती स्त्रियाँ कजरी नामक विशेष व्यंजन बनाती हैं, जो व्रत के नियमों के अनुसार बनाया जाता है। यह व्यंजन करवा चौथ के मठेरे से बनाने के लिए जाना जाता है, जिसमें विशेष रूप से गेहूं का आटा, गुड़ और घी होता है।

व्रत समापन

सावन कृष्ण पक्ष की तृतीया को व्रत के समापन पर व्रती स्त्रियाँ पुनः स्नान करती हैं और भगवान शिव और पार्वती की आराधना करती हैं। इसके बाद व्रती स्त्रियाँ अपने पति और परिवार के साथ खुशियों भरे त्योहार का आनंद उठाती हैं।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि कजरी तीज के व्रत को रखने से पहले और व्रत के दौरान विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि यह एक धार्मिक और पारंपरिक त्यौहार है जिसमें नियमों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

कजरी तीज का महत्व

कजरी तीज का महत्व भारतीय संस्कृति में विशेष रूप से स्त्रीशक्ति, प्रेम और परिवार के महत्व को समझाने के लिए है। यह त्योहार भगवान शिव और पार्वती की पूजा के रूप में मनाया जाता है और सावन मास में इसका विशेष महत्व होता है। इस त्योहार को खासकर उत्तर भारतीय राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है और यह समाज में विभिन्न अनुष्ठान और धार्मिक अनुदानों का अवसर प्रदान करता है।

कजरी तीज के महत्व को निम्नलिखित कारणों से समझा जा सकता हैः

स्त्रीशक्ति का प्रतीक

कजरी तीज त्योहार में महिलाएं भगवान शिव और पार्वती की भक्ति के माध्यम से स्त्रीशक्ति को प्रतिष्ठित्त करती है। इसमें महिलाए अपने पति और परिवार के सुख-शांति की कामना करती हैं और उन्हें प्रेम और समरसता के संदेश का प्रतीक देती हैं।

शिव-पार्वती के विवाह का स्मरण

कजरी तीज के दिन भगवान शिव और पार्वती के विवाह का स्मरण किया जाता है। इस दिन को शिव-पार्वती के दिव्य संयोग के रूप में माना जाता है और यह संयोग सृष्टि के सार्थक बन्धन का प्रतीक होता है।

परिवार के महत्व का प्रतीक

यह त्योहार परिवार के महत्व को भी प्रतिष्ठित करता है। इस दिन स्त्रियाँ अपने पति और परिवार के लंबे जीवन और सुख-शांति की कामना करती है, जिससे परिवार में एकता और समरसता बढ़ती है।

सावन मास के व्रत का महत्व

सावन मास को हिंदू धर्म में भगवान शिव का खास महीना माना जाता है। इस मास में भगवान शिव की पूजा, वल और ध्यान करने से मनुष्य अपने जीवन में आनंद, सुख और समृद्धि को प्राप्त कर सकता है।

कजरी तीज त्यौहार ने भारतीय संस्कृति में भगवान शिव और पार्वती के अद्भुत संयोग को प्रतिष्ठित किया है और साथ ही सामाजिक एकता, प्रेम, और परिवार के महत्व को भी उजागर किया है। इस उत्सव को मनाकर भगवान की कृपा प्राप्त करने की कामना की जाती है और व्रती स्त्रियों अपने प्रियजनों के साथ खुशियों से इसे मनाती हैं।

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