जग जननी पहाड़ों वाली माँ लिरिक्स – नरेंद्र चंचल

जग जननी पहाड़ों वाली माँ

जग जननी पहाड़ों वाली माँ
मईया हमें न बिसारियो,
चाहे लाख भक्त मिल जाहीं
हम सम तुम को बहुत माँ।
तुम सम हमको नाहीं।।

भक्तों की लाज रखो माँ भवानी
मेरे घर आजा तेरी मेहरबानी-2
जग जननी पहाड़ों वाली माँ
कभी भक्तों के घर आ जाओ-2
अपने ही दिए हुए अन्न जल का
कभी खुद ही भोग लगा जाओ
जग जननी पहाड़ों वाली माँ-2-2

इस घर में हमारा कुछ भी नहीं
जो कुछ भी है माँ सब कुछ तेरा है
चाहे दुःख है यहाँ चाहे सुख की घड़ी
चाहे रोशनी चाहे अन्धेरा है
हम् चाकर बन कर सेवा करें-2
बन मालिक हुक्म चला जाओ
जग जननी पहाड़ों वाली माँ…..
अपने ही दिए हुए अन्न जल का…..

यहाँ कुछ है सुदामा के चावल
यहाँ विदुर का माँ कुछ साग भी है
कुछ श्रद्धा का सागर उमड़ा हुआ
कुछ भक्ति लगन अनुराग भी है
कुछ तुम भी अपने चरणों का-2
हमें अमृत पान करा जाओ
जग जननी पहाड़ों वाली-2

घर अपना बना लो इस घर में
हम मिल जुल कर माँ रह लेंगे
तेरी ममता की छांव में अम्बे
कुछ सुन लेंगे कुछ कह लेंगे
माँ बच्चों के पावन रिश्ते की-2
कुछ झलक हमें दिखला जाओ
जग जननी पहाड़ों वाली-2
भक्तों की लाज रखो माँ भवानी
मेरे घर आजा तेरी मेहरबानी-4

सारी सारी रात जगराते में जोत जगी लिरिक्स

सुनो सुनो माँ की महिमा

शेरांवाली दे टिक्के कदे होने ना फ़िक्के

मोहे लादो भजन वाली वही माला जा के रटने से मिल जाए नंदलाला

लग जा गुरा दे चरणी गुरू पार लगाना लिरिक्स

सतगुरु मेरे सांवरिया मैनु रख ले चरणा दे नेड़े लिरिक्स

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