
माता का भजन – जाईं वे कबूतरा जाईं वे
जाईं जाईं वे कबूतरा जाईं वे
शेराँ वाली दे भवन ते जाईं वे-2
असीं दूर खड़े मजबूर बड़े-2
साड़ा माँ नू हाल सुनाईं वे
जाईं-जाईं वे कबूतरा-2
जोतां वालीए जगदी जोत तेरी
मेरे घर विच दीपक जगया न
ममता दे अभागे बूटे नूं
फल कोई खुशी दा लगया न-2
गल दिले दी माँ नूं कहीं खुल के-2
रता झिजकी न घबराई वे
जाईं-जाईं वे कबूतरा-2
असीं सुखना सुख-सुख हार गए
कोई सुखना पूरी होई नहीं-2
दौलत दे तां घर विच ढेर ने माँ,
पर उसदा बारस कोई नहीं
बाहवां दे झुले तरस रहे-2
कुछ रोके तरले पाईं वे
जाई-जाईं वे कबूतरा-2
इकना दे घर विच कई-कई माँ
इकना दे बेड़े इक नईयों-2
तेरी मेहर ते निर्भर ए नेमत
कोई विच दिवारी नहीं विक नईयों-2
निर्दोष माँ भूल-चूक माफ करे-2
जे रूसी ए उसनूं मनाई वे
जाई-जाईं वे कबूतरा-2
असीं दूर खड़े मजबूर बड़े
साड़ा माँ नूं हाल सुनाई वे
जाई-जाई बे कबूतरा…..4-5
जय माता दी
जग जननी पहाड़ों वाली माँ लिरिक्स – नरेंद्र चंचल
सारी सारी रात जगराते में जोत जगी लिरिक्स
बड़ी लीला सुनी तेरे भवनों की लिरिक्स
सुनो सुनो माँ की महिमा लिरिक्स | नरेंद्र चंचल की भेंट
शेरांवाली दे टिक्के कदे होने ना फ़िक्के लिरिक्स
सोहणे नाल अखिया ला बैठी लिरिक्स
सतगुरु के दीवाने हैं ये शान से कहते हैं